रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 21:10 GMT तक के समाचार
सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से
अमरीका के न्यू जर्सी में आजकल दक्षिण एशियाई रंगमंच महोत्सव चल रहा है.
अमरीका में रह रहे भारतीय और बांग्लादेशी मूल के रंगमंच से जुड़े लोगों ने मिलकर पहली बार इस तरह के महोत्सव का आयोजन किया है.
इस नाट्य महोत्सव में चार देशों के रंगमंच से जुड़े कलाकारों की नौ टीमें हिस्सा ले रही हैं.
चार भाषाओं में नाटक करने वाली टीमें हिंदी, मराठी, बांग्ला के अलावा अंग्रेज़ी के नाटक खेल रही हैं.
इसका आयोजन इपिक एक्टर्स वर्कशाप और मृत्तिका नामक नाट्य संस्था ने मिलकर किया है.
इस समारोह में वाशिंगटन की नाट्य भारती नामक मंडली, नार्थ कैरोलाइना की रसिक रंगमंच, न्यू जर्सी की इपिक एक्टर्स वर्कशाप और एथनोमीडिया, न्यूयॉर्क की सलाम थिएटर और ढाका ड्रामा, टोरोंटो की बांग्या नाट्य परिषद व बंगाली ड्रामा ग्रुप और बॉस्टन की पेरिनियल थिएटर नामक रंगमंच मंडलियां शामिल हैं.
इस महोत्सव के आयोजक और इपिक एक्टर्स वर्कशाप के अध्यक्ष दिपेन रे का कहना है कि वो कई वर्षों से इस तरह के कार्यक्रम की कोशिश में लगे थे.
उनका कहना था,'' अमरीका में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका से आकर बसनेवाले लोगों के लिए उन्हीं की भाषाओं में नाटक कम ही होते हैं. इसीलिए इस तरह का समारोह उन लोगों को नाटक से जोड़े रखने में मदद करेगा.''
आयोजकों की कोशिश है कि अमरीका और कनाडा में दक्षिण एशियाई मूल के जितने भी रंगकर्मी हैं, वे एक साथ एक छत तले अपनी कला का प्रदर्शन करें और रंगमंच को अमरीका में भी ज़िंदा रखने की कोशिश की जाए.
इस महोत्सव के जरिए आयोजकों का मक़सद है कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के लोग मिलकर अलग अलग इलाक़ों और रिवाजों पर आधारित नाटक खेलकर विभिन्न संस्कृतियों को दर्शाने की कोशिश करें.
रंगमंच के पुराने कलाकार औऱ बॉलीवुड के अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर ख़ासतौर से भारत से इस महोत्सव में शामिल होने के लिए आए.
मुश्किल काम
इस महोत्सव के आयोजक मानते हैं कि अमरीका में बसे हुए दक्षिण एशियाई लोगों की रंगमंच की तरफ दिलचस्पी पैदा करना एक बहुत मुश्किल काम है.
लेकिन फिर भी यह महोत्सव अमरीका में देसी रंगमंच की दुनिया के लिए एक अहम कोशिश मानी जा रही है.
आयोजकों को सराहते हुए अमोल पालेकर कहते हैं, “ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि अमरीका में भारतीय रंगमंच और अलग अलग भाषाओं की मंडलियां इकट्ठा आकर भारतीय थिएटर का समारोह कर रहे हैं. यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. ”
महोत्सव के पहले ही दिन जब हिंदी में पहला नाटक “ यायाती ” शुरू हुआ तो सैकड़ों की संख्या में दर्शक सभागार में मौजूद थे. करीब दो घंटे लंबा यह नाटक गिरीश कर्नाड ने लिखा है और इसका निर्देशन सुनीला प्रधान ने किया था.
वॉशिंगटन की नाट्क मंडली, नाट्य भारती ने इस रोचक नाटक का मंचन किया.
इस नाटक की निर्देशिक सुनीला प्रधान कहती हैं, “मुझे हमेशा से प्राचीन काल की कहानियां बहुत पसंद थीं. और इसी पर आधारित गिरीश कर्नाड के इस नाटक में मैने निर्देशक और कलाकारों दोनों के लिए काफी क्रियाशीलता देखी, इसीलिए मैंने इसका निर्देशन किया.”
इस महोत्सव के अन्य नाटकों में पी एल देशपांडे द्वारा लिखित और मोहन डाली द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक 'शतरंज के मोहरे' भी शामिल है.
इसके अलावा गुरूदेव रवींद्रनाथ ठाकुर का रक्तकर्बी और कर्ण और कुंती नामक नाटक अंग्रेज़ी में पेश किया जाएगा. मराठी में आनंद लागू का 'आई रिटायर होती' का भी मंचन किया जाएगा.
इस समारोह में एक और ख़ास बात यह है कि हर भाषा के नाटकों का अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद भी साथ साथ स्टेज के पीछे लगी स्क्रीन पर दिखता है जिससे लोगों को मराठी, हिंदी, बांग्ला सभी भाषा के नाटकों को समझने में आसानी होती है.