सोमवार, 26 जून, 2006 को 15:56 GMT तक के समाचार
नादिया परवेज़
बीबीसी उर्दू संवाददाता, दिल्ली
पाकिस्तान के मशहूर गज़ल गायक ग़ुलाम अली का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में सबसे अहम भूमिका इंसानियत की है.
उनका कहना है कि दोनों देशों के लोगों के दिलों में मौजूद प्यार और मोहब्बत की वजह से ही संबंध बेहतर हुए हैं और ये प्यार जितना बढ़ेगा रिश्ते उतने ही मज़बूत होंगे.
ग़ुलाम अली का यह भी कहना है कि जब भी कोई कलाकार पाकिस्तान से भारत आता है तो यहाँ के लोग उसे बेहद प्यार देते हैं और उसे सराहते हैं.
इसी तरह जब कोई कलाकार भारत से पाकिस्तान जाता है तो उसका खुले दिल से स्वागत किया जाता है.
यह पहलू भी दोनों देशों के बीच इंसानियत के रिश्ते को और भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.
हाल ही राजधानी दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ग़ुलाम अली भारत आए थे.
बीबीसी से बातचीत में ग़ुलाम अली ने स्वीकार किया कि उन्हे सबसे ज़्यादा खुशी उस वक़्त मिलती है जब वो स्टेज पर अपनी कला का प्रदर्शन करते है अपने चाहनेवालों से रूबरू होते हैं.
लोगों का प्यार
उनका कहना था कि वो जहाँ भी जाते हैं लोग उनके इंतज़ार में घंटों खड़े रहते हैं और जिस तरफ से वो गुजरते हैं उनके चाहने वाले उन्हें घेर लेते हैं.
वो कहते हैं, ‘‘प्रशंसकों का प्यार ही हौसला बढ़ाता है.’’
पिछले 46 वर्षों से गज़ल गानेवाले गुलाम अली को इस बात का अफ़सोस है कि इन दिनों लोगों की गज़ल गाने में दिलचस्पी बहुत कम हो गई है और इसका कसूरवार वो सुनने वालों को मानते हैं.
वो कहते है कि जब लोग सुनने में दिलचस्पी नहीं लेंगे तो गज़ल गायकी किस तरह परवान चढ़ेगी.
ग़ुलाम अली कहते हैं कि मीडिया ने भी ग़ज़ल को स्थान नहीं दिया जो इसे देना चाहिए था.
‘’चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है’’ और ‘‘यह दिल यह पागल दिल मेरा कुछ बुझ गया आवारगी’’ जैसे मशहूर गज़लों को 80 के दशक में हिंदी फ़िल्मों में भी इस्तेमाल किया गया था.
यह गज़ल बॉलीवुड में काफी मशहूर हुई लेकिन पिछले कुछ बरसों में गुलाम अली ने हिंदी फ़िल्मों को अपनी जादुई आवाज़ से महरूम रखा है.
उनका कहना है, ‘‘ मुझे जो पसंद आता है मैं सिर्फ वो ही गाता हूँ. जल्द ही मेरी तीन चार गज़लें हिंदी फ़िल्मों में सुनाई देंगी.’’