शुक्रवार, 09 जून, 2006 को 15:27 GMT तक के समाचार
राजपाल यादव के बारे में अगर यह कहा जाए कि आज फ़िल्में उनके नाम पर भी बिकती हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. आज वह नंबर वन हास्य अभिनेता के तौर पर जाने जाने लगे हैं.
अपनी फ़िल्म चुप चुपके की रिलीज़ के सिलसिले में वह यूके आए तो बीबीसी श्रॉपशायर टीम ने उनसे बातचीत की. प्रस्तुत हैं कुछ अंश:
आपने एक हास्य अभिनेता के तौर पर अब तक लगभग 65 फ़िल्मों में काम किया है. क्या यह बात कभी आपके लिए महत्वपूर्ण रही कि आप भी एक हीरो बनें?
नहीं बिलकुल नहीं. सिनेमा का जो विकास हुआ है उसके लिहाज़ से कोई भी अभिनेता हीरो बने बग़ैर एक सफल अभिनेता बन सकता है.
आपने अब तक जितने किरदार निभाए हैं, उनको देखते हुए 'चुप चुपके' में आपका रोल कितना अलग है?
मैं पहली बार एक मछुआरा बना हूँ. यह एक सीधा सादा चरित्र है जो एक अन्य मछुआरे के साथ मिल कर क़र्ज़ में डूबे लड़के की मदद करता है. यह दूसरा रोल परेश रावल ने निभाया है.
आप लगता है प्रियदर्शन की फ़िल्मों का एक अटूट हिस्सा हैं. एक फ़िल्मकार के तौर पर आप उन्हें कैसा मानते हैं?
कहानी में चाहे कितना भी भ्रम या ग़लतफ़हमी क्यों न हो, प्रियदर्शन अपने विषय, शैली और चरित्रों के बारे में बिलकुल स्पष्ट होते हैं. हर कलाकार को उसकी भूमिका के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं. इससे हमारा काम बहुत आसान हो जाता है.
'जंगल' और 'शूल' में कुछ क्षणों की भूमिका के बाद 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ' में प्रमुख रोल दे कर रामगोपाल वर्मा ने भी आपका कैरियर संवारने में एक अहम रोल निभाया. क्या आपको लगता है उनके बिना आप इस मुक़ाम पर पहुँच सकते थे?
जी, रामगोपाल वर्मा मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. एक फ़िल्मकार के तौर पर वह बेहतरीन कास्ट का चयन करते हैं. यही वजह है कि उनकी फ़िल्में दर्शकों का ध्यान खींचती हैं. मुझे नहीं लगता कि उनकी मदद के बिना मैं बॉलीवुड में अपनी कोई जगह बना पाता.
लेकिन, फिर यह भी है कि रामगोपाल वर्मा को मेरे अभिनय की प्रतिभा पर विश्वास था.
आज हर फ़िल्मकार आपको अपनी फ़िल्म का हिस्सा बनाना चाहता है. आप अपने रोल का चयन कैसे करते हैं?
मेरे लिए यह बहुत ज़रूरी है कि मैं जो चरित्र निभाऊँ वह दिलचस्प हो. वह चाहे पहेली की तरह सिर्फ़ तीन सीन में दिखाई दे लेकिन जो भी दिखे, लोगों को पसंद आए. रोल की लंबाई कितनी है, यह अहम नहीं है. अहम यह है कि मैं उसे कैसे निभाता हूँ.
कोई ऐसा अभिनेता जिससे आपको प्रेरणा मिलती हो?
चार्ली चैपलिन. मैं उनकी नक़ल नहीं करता लेकिन उनसे प्रेरित ज़रूर हुआ हूँ. उनकी हर भाव-भंगिमा कितना कुछ कह जाती थी. जैसे उन्होंने दुनिया भर के सिनेमा पर अपनी छाप छोड़ी है मैं वैसा ही कुछ करना चाहता हूँ.
चुप चुपके अलावा आप और किन फ़िल्मों से उम्मीद लगाए हैं?
एक तो रामगोपाल वर्मा की 'हेलो, हम लल्लन बोल रहे हैं', रवि चोपड़ा की 'बाबुल' और अहमद ख़ान की 'फ़ूल ऐंड फ़ाइनल'. मैं उदयकंठ की 'लेडीज़ टेलर' को लेकर भी बहुत उत्साहित हूँ जो कुछ हद तक फ़ैशन डिज़ायनर मनीष मल्होत्रा के जीवन पर आधारित है. इसमें मैं एक दर्ज़ी का रोल कर रहा हूँ.
असली जीवन में राजपाल यादव क्या अपने आसपास के लोगों को हँसाते रहते हैं?
जी नहीं. मैं असलियत में एक बहुत गंभीर व्यक्ति हूँ.