मंगलवार, 06 जून, 2006 को 23:58 GMT तक के समाचार
राजनीतिक विरोध के बीच आख़िर गुजरात के शहर जामनगर के एक सिनेमाघर में आमिर ख़ान की फ़िल्म फ़ना प्रदर्शित हो गई.
कड़ी सुरक्षा के बीच दर्शकों ने इसके तीन शो देखे और इस बीच बाहर भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते रहे.
गुजरात के किसी भी सिनेमाघर में पहली बार फ़ना फ़िल्म दिखाई गई है.
दरअसल गुजरात में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों इस फ़िल्म का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें मुख्य भूमिका आमिर ख़ान ने निभाई है.
दोनों दलों का आरोप है कि नर्मदा बचाओ आंदोलन के दिल्ली में चल रहे धरने में जाकर आमिर ख़ान ने नर्मदा पर बन रहे सरदार सरोवर बाँध का विरोध किया था.
कथित तौर पर सिनेमाघरों के संचालकों ने भी इसी आधार पर फ़िल्म को प्रदर्शित करने से इंकार कर दिया था और जामनगर में फ़िल्म प्रदर्शित होने के बाद भी उन्होंने कहा है कि फ़ना का विरोध जारी है.
इससे पहले फ़िल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वो पुलिस महानिदेशक को निर्देश दें कि वो फ़िल्म के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की व्यवस्था करवाएँ लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि यदि कोई सिनेमाघर मालिक इस फ़िल्म को दिखाना चाहे तो उसे पूरी सुरक्षा मुहैया करवाई जाए.
मंगलवार को जामनगर के अंबर सिनेमाघर के मालिक विमल मदान ने फ़ना फ़िल्म को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया.
उनका दावा था कि पहले दिन के तीनों शो लगभग हाउसफुल थे.
उन्होंने कहा, "सिनेमाघर चलाना मेंरा व्यवसाय है और मेरे पास फ़ना के प्रिंट्स हैं और मैं इसे प्रदर्शित कर रहा हूँ."
पुलिस के आला अधिकारियों के अनुसार सिनेमाघर में चार सबइंस्पेक्टर सहित 30 सिपाही सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे.
आमिर ख़ान का कहना है कि वो बाँध बनाए जाने के ख़िलाफ़ नहीं हैं और धरने में शामिल होकर वे विस्थापितों के पुनर्वास की माँग का समर्थन कर रहे थे.
जब आमिर ख़ान मेधा पाटकर के धरने का समर्थन करने पहुँचे थे तो गुजरात में कई सिनेमाघरों में चल रही उनकी फ़िल्म 'रंग दे बसंती' का विरोध शुरु कर दिया था और कई सिनेमाघरों में तोड़फोड़ की थी.
फ़ना फ़िल्म में आमिर ख़ान और काजोल की मुख्य भूमिका है.