रविवार, 04 जून, 2006 को 21:10 GMT तक के समाचार
नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
बॉलीवुड के जाने-माने फ़िल्मकार महेश भट्ट ने कहा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जो जनहित याचिका दायर की है, वो आमिर ख़ान या फ़ना पर ही केंद्रित नहीं और यह मुद्दा इससे बड़ा है.
उन्होंने कहा कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीविका के अधिकार का मामला है. महेश भट्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ़ फ़िल्म वालों से नहीं जुड़ा हुआ है बल्कि ये हर नागरिक से जुड़ा हुआ है.
महेश भट्ट ने कहा कि उन्होंने अदालत से सिर्फ़ ये पूछा है कि जिस फ़िल्म को सेंसर बोर्ड ने प्रमाणपत्र दे दिया है, उसके प्रदर्शन को रोकना क्या उचित है?
बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब में महेश भट्ट ने कहा कि देश में बड़ी ख़तरनाक प्रवृत्ति शुरू हो गई है. इस कार्यक्रम में जाने-माने समीक्षक सुधीश पचौरी ने भी श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए.
महेश भट्ट ने कहा कि मान लीजिए आमिर ख़ान ने कुछ ग़लत भी कहा है या उनकी समझ सीमित है, तो क्या उन्हें इस तरह अपमानित करना चाहिए.
रोज़ी-रोटी
एक सवाल के जवाब में महेश भट्ट ने कहा कि अगर आमिर ख़ान किसी आंदोलन से सक्रियता से जुड़ते हैं, तो उनका विरोध भी होगा और वे इससे सहमत है.
उन्होंने कहा, "फ़ना केवल आमिर ख़ान की फ़िल्म तो है नहीं. इस फ़िल्म के साथ कई लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी है. यो तो बिल्कुल जॉर्ज बुश की तरह किया गया. अगर ओसामा बिन लादेन से समस्या है तो पूरे अफ़ग़ानिस्तान को बर्बाद कर दिया. इराक़ में सद्दाम हुसैन से समस्या है, तो पूरे इराक़ पर बम मार कर बर्बाद कर दिया."
महेश भट्ट से जब ये सवाल पूछा गया कि दा विंची कोड को कई राज्यों में न दिखाए जाने के मामले पर उन्होंने फ़ना जैसी पहल क्यों नहीं की, तो उन्होंने कहा कि लोगों के पास सूचनाओं का अभाव है.
उन्होंने कहा कि दा विंची कोड के मामले पर निर्माताओं के एसोसिएशन ने पहल की थी और सेंसर बोर्ड से पास होने के बावजूद उसे न दिखाए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी लेकिन मीडिया ऐसी ख़बरों के बारे में नहीं बताता.