सोमवार, 29 मई, 2006 को 17:01 GMT तक के समाचार
आमिर ख़ान की फ़िल्म 'फ़ना' को गुजरात में रिलीज़ न होने देने के विरोध में बॉलीवुड की कई हस्तियां अब आमिर ख़ान के पक्ष में उतर आई हैं.
फ़िल्मी हस्तियों ने कहा कि आमिर ख़ान को अपनी बात कहने का हक़ है और इस आधार पर फ़िल्म के प्रदर्शन का विरोध करना ग़लत है.
साथ ही बॉलीवुड के फ़िल्म निर्माताओं के एक संगठन ने गुजरात सरकार को इस फ़िल्म के प्रदर्शन के लिए शुक्रवार तक की समयसीमा दी है. क़रीब 250 फ़िल्मकार इस संगठन के सदस्य हैं.
उधर गुजरात में डीवीडी और वीसीडी वितरकों ने सोमवार को घोषणा की है कि वे राज्य में आमिर ख़ान अभिनीत फ़िल्मों का वितरण नहीं करेंगे.
अहमदाबाद वीडियो लाइब्रेरी ओनर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता ज्योत वागज्ञानी ने बताया कि यह फ़ैसला आमिर ख़ान की नर्मदा बाँध के ख़िलाफ़ की गई टिप्पणी के विरोध में लिया गया है.
विवाद
गुजरात में आमिर का विरोध करनेवालों ने फ़ना को राज्य में रिलीज़ नहीं होने दिया और कहा कि आमिर नर्मदा बाँध के बारे में अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगें, तभी इस फ़िल्म को रिलीज़ होने दिया जाएगा.
इसपर आमिर ख़ान ने यह कहते हुए माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया कि उन्होंने कोई ग़लत बात नहीं कही है.
पिछले दिनों आमिर ख़ान ने इस बाबत पत्रकारों से बातचीत में इसे दोबारा स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने बाँध के निर्माण का कभी विरोध नहीं किया.
आमिर ने बताया कि उन्होंने सिर्फ़ इतना ही कहा है कि बाँध की वजह से विस्थापित हो रहे लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान देना चाहिए और ऐसा कहकर उन्होंने कोई ग़लती नहीं की है.
आमिर का पक्ष लेते हुए सोमवार को बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों ने भी फ़िल्म का प्रदर्शन रोकने की निंदा की.
इन लोगों ने गुजरात सरकार की उन सिनेमाघरों को सुरक्षा मुहैया न कराने की भी आलोचना की है जो आमिर की इस फ़िल्म को दिखाना चाहते हैं.
सुभाष घई, यश चोपड़ा, अनिल कपूर और अनुपम खेर जैसी बड़ी हस्तियों सहित बड़ी तादाद में फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों ने मुंबई में एक प्रेस कांफ़्रेंस करके आमिर के पक्ष में अपना समर्थन जताया.
प्रतिक्रियाएं
उन्होंने कहा कि अगर गुजरात सरकार इस फ़िल्म को राज्य में रिलीज़ करने की अनुमति नहीं देती है तो उनके पास आगे की रणनीति भी तैयार है.
हालांकि उन्होंने अपनी इस रणनीति का अभी से खुलासा करने से इनकार कर दिया.
फ़िल्म अभिनेता अनिल कपूर ने पत्रकारों से कहा, "दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को अपनी बात कहने की आज़ादी है. ऐसे में इस फ़िल्म को प्रदर्शित न होने देना ग़लत है."
उन्होंने कहा कि आमिर ने बाँध के विरोध में नहीं बल्कि ग़रीब किसानों के पुनर्वास के पक्ष में टिप्पणी की थी जो कि ग़लत नहीं है.
जाने-माने निर्देशक सुभाष घई ने भी आमिर का पक्ष लेते हुए कहा कि जो लोग फ़िल्म को देखना चाहते हैं, उन्हें रोका न जाए.
बॉलीवुड की कई हस्तियों ने दोहराया कि जब इस फ़िल्म पर सेंसर बोर्ड को कोई आपत्ति नहीं है तो फिर किसी और को इस फ़िल्म का प्रदर्शन रोकने का कोई हक़ नहीं है.