शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 23:33 GMT तक के समाचार
विरोध और विवाद के बीच दो फ़िल्में 'फ़ना' और 'दा विंची कोड' शुक्रवार को भारत के सिनेमा घरों में रिलीज़ हो गईं.
दोनों फ़िल्मों का दो अलग-अलग कारणों से विरोध हो रहा है.
विरोध के कारण ही 'फ़ना' फ़िल्म गुजरात में रिलीज़ नहीं की जा सकी. तो 'दा विंची कोड' का प्रदर्शन पंजाब गोवा और नागालैंड में रोक दिया गया है.
एक रोमांटिक फ़िल्म है जिसमें एक नेत्रहीन लड़की और एक टूर गाइड के प्रेम की कहानी है.
लेकिन इस प्रेम कहानी पर किसी को ऐतराज़ नहीं था. ऐतराज़ इसके नायक आमिर ख़ान को लेकर है.
'फ़ना' फ़िल्म का गुजरात में विरोध हो रहा है क्योंकि वहाँ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर आमिर ख़ान का विरोध कर रहे हैं.
उनका कहना है कि आमिर ख़ान ने पिछले दिनों नर्मदा पर बन रहे सरदार सरोवर बाँध का विरोध किया था लिहाज़ा वे 'गुजरात के दुश्मन' हैं और उनकी फ़िल्म को रिलीज़ नहीं होने दिया जा सकता.
उल्लेखनीय है कि नर्मदा बाँध के विस्थापितों के पुनर्वास की माँग पर अनशन पर बैठी मेधा पाटकर का समर्थन करने के लिए आमिर ख़ान कुछ और फ़िल्म कलाकारों के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर चले गए थे.
वहाँ उन्होंने विस्थापितों के पुनर्वास की माँग का समर्थन किया था और उस समय भी गुजरात में आमिर की फ़िल्म रंग दे बसंती का विरोध शुरु हो गया था.
अब फ़िर राजनीतिक दलों ने आमिर ख़ान की फ़िल्म का विरोध शुरु किया और इसे सिनेमाघरों में नहीं लगने दिया.
भाजपा ने आमिर ख़ान से माफ़ी माँगने की बात कह रही है लेकिन आमिर ख़ान ने साफ़ कर दिया है कि वे इस मामले में माफ़ी नहीं माँगने वाले.
इसके अलावा एक विवाद फ़िल्म को मल्टीप्लेक्स में लगाने न लगाने का था लेकिन वो विवाद सुलझ गया था.
फ़िल्म गुजरात के अलावा सभी राज्यों में शुक्रवार से सिनेमा घरों में लग गई.
'दा विंची कोड'
दूसरी ओर हॉलीवुड फ़िल्म 'दा विंची कोड' को लेकर वही विवाद था जो लगभग पूरी दुनिया में था.
इस फ़िल्म में ईसा मसीह के जीवन को लेकर जो कुछ दिखाया गया है उसे लेकर विवाद हो रहा था. वैसे ये विवाद डैन ब्राउन की किताब आने के बाद से ही चल रहा है और फ़िल्म ने इसे और हवा दे दी.
उल्लेखनीय है कि फ़िल्म को लेकर रोमन कैथोलिक समुदाय ने भारत में भी आपत्ति की थी और इसके बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कैथोलिक समुदाय के प्रमुख व्यक्तियों के साथ ये फ़िल्म देखी थी.
कैथोलिक धार्मिक नेताओं ने कहा था कि यदि फ़िल्म को केवल वयस्कों को देखने की अनुमति दी जाती है और फ़िल्म के शुरु और अंत में ये घोषणा दिखाई जाती है कि फ़िल्म सिर्फ़ कल्पना पर आधारित है तो उन्हें फ़िल्म पर कोई आपत्ति नहीं है.
इन शर्तो को फ़िल्म के वितरक ने मान ली थी और इसके बाद एक हफ़्ते के विलंब से फ़िल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में लग गई.
सेंसर बोर्ड ने बहुत पहले ही इसे प्रमाण पत्र दे दिया था.
लेकिन कैथोलिक समुदाय के विरोध के बाद तीन भारतीय राज्यों ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी है.
इसमें पंजाब, गोवा और नागालैंड हैं. गोवा और नागालैंड में तो इसाई धर्मावलंबियों की बड़ी संख्या है लेकिन पंजाब में एक प्रतिशत के आसपास ही इसाई हैं फिर भी वहाँ इस पर रोक लगा दी गई.
दोनों फ़िल्मों के विरोध को लेकर हुए विरोध पर बुद्धिजीवियों ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि इससे लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं.