रविवार, 21 मई, 2006 को 02:49 GMT तक के समाचार
एस नियाज़ी
भोपाल से
भोपाल के प्रेमनारायण राव हारमोनियम बहुत अच्छा बजाते हैं. आप कहेंगे, इसमें क्या ख़ास बात है. बहुत से लोग अच्छा हारमोनियम बजाते हैं.
लेकिन बस ख़ास बात यह है कि प्रेमनारायण सिर्फ़ हाथ से ही नहीं बल्कि कोहनी, सिर, घुटने और ठोढ़ी से भी हारमोनियम बजाते हैं.
प्रेमनारायण राव की एक और ख़ासियत है कि वो हारमोनियम बजाते वक़्त कई बार सर पर कलश या मटका भी रख लेते हैं.
प्रेमनारायण राव पिछले 16 सालों से मानस मंडल में हारमोनियम बजाने का काम कर रहे है. इसके साथ साथ वो रामायण का पाठ भी करते हैं.
तीन साल पहले एक महात्मा को कुछ इस तरह करते हुए देखने के बाद उन्हें भी ऐसा करने की प्रेरणा मिली.
महात्मा के जाने के बाद राव ने नियमित रुप से अभ्यास शुरु कर दिया. कुछ समय बाद उन्हें इस में कामयाबी भी मिल गई. अब ये राव के नियमित कार्यक्रम का हिस्सा होता है.
मेहनत
राव कहते है कि अगर इंसान किसी चीज़ को पाने के लिए मेहनत करे तो ये नामुमकिन है कि उसे वह चीज़ न मिले.
कुछ लोगों को उनकी कोशिश जरुर बेतुकी लगती है, मगर उनके परिवार के लोग इससे काफ़ी खुश है और राव की समय-समय पर हौसला अफज़ाई भी करते है.
राव हर रोज़ रियाज़ के लिए लगभग दो घंटे का वक़्त निकाल लेते है. उनकी इच्छा है कि एक दिन वह पूरा का पूरा कार्यक्रम इसी ही तरह प्रस्तुत करें.
उनका कहना है,'' इस वक़्त जिस्म के इन हिस्सों से पूरा कार्यक्रम कर पाना मुमकिन नहीं है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जल्द ही इसमें कामयाब हो जाऊँगा.''
राव की कोशिश है कि अब हारमोनियम बजाने के लिए बदन के दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल किया जाए. अब वो पैरों से हारमोनियम बजाने में जुटे है. राव कहते है, '' मैं जिस्म के हर हिस्से से हारमोनियम बजाना चाहता हूँ.''
हारमोनियम बजाने की ये कला राव इस वक़्त लगभग 20 फ़िल्मी गीतों पर ही आज़मा पाते है. उनकी कोशिश इसको लगातार बढ़ाने की है.