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रविवार, 07 मई, 2006 को 21:09 GMT तक के समाचार

वेदिका त्रिपाठी
मुंबई से

थियेटर, फ़िल्म और टीवी में संतुलन ज़रुरी

अगर जेहन में रजित कपूर का नाम आता है तो एक मंजे हुए कलाकार की छवि आंखों के आस-पास से गुजरने लगती है, जिसे पता है कि उसे क्या करना है और निर्माता-निर्देशक उससे क्या चाहता है.

बहुत ही कम कलाकार ऐसे होते हैं जो एक कलाकार वाले शो में काम करना पसंद करते हैं और रजित कपूर उनमें से एक है. इन्होंने ‘वाइसेस्ट फ़ूल ऑन अर्थ’ नामक एक नाटक में कई भूमिकाओं वाला किरदार निभा कर अपने सर्वश्रेष्ठ अभिनय का परिचय भी दे दिया है.

वैसे इनके ज्यादातर चाहने वाले इन्हें फ़िल्म और टीवी कलाकार के रूप में ही जानते हैं. लेकिन मुंबई के दर्शकों को इनके थियेटर प्लेज ज़यादा आकर्षित करते हैं जिनमें ‘लव लेटर्स’, ‘जमीलाबाई कलाली’, ‘लॉरेंस साब’ जैसे कई नाटकों की भरमार है.

रजित कपूर से ख़ास बातचीत

सवाल : काफ़ी समय बाद आप फिल्मों में वापसी कर रहें हैं ? इसकी वजह ?
रजित : हां, जहां तक फ़िल्मों का सवाल है थोडा लंबा समय ज़रूर लग गया लेकिन नाटक और अन्य कई कामों में उलझने की वजह से फ़िल्मों के लिए समय नहीं निकाल पा रहा था. आने वाले दिनों में जर्मनी में आयोजित होने वाले एक नाटक के अलावा मेरी तीन फ़िल्में ‘डेडलाइन-सिर्फ 24 घंटे’, ख़फा और दहक रिलीज़ के लिए तैयार है.

सवाल : फ़िल्म ‘डेडलाइन-सिर्फ 24 घंटे’ में आपके किरदार के बारे में बताइए ?
रजित : इस फिल्म में मैं एक हार्ट सर्जिन के किरदार में हूं जिसे उसके अच्छे कामों के लिए सम्मानित भी किया जाता है. यह एक अपहरण की कहानी है लेकिन इस फ़िल्म में अपहरण पैसों के लिए नहीं किया गया है. और य़ही इस फ़िल्म को दूसरी फ़िल्मों से अलग बनाती है.

सवाल : एक कलाकार के लिए फ़िल्मों और थियेटर के बीच संतुलन बनाए रखना कितना मुश्किल होता है ?
रजित : थियेटर का जो अनुशासन है वह किसी भी फ़िल्म या टेलीविजन से काफ़ी अलग होता है. और जहां तक संतुलन बनाए रखने की बात है तो वह मुश्किल नहीं होता है लेकिन हां उसका ख़ास ध्यान रखना ज़रूरी होता है.

सवाल : आप अपने आप को किस तरह का कलाकार मानते हैं ?
रजित : मैं अपने आप को किसी एक स्लॉट में फिट करके नहीं रखना चाहता हूं. हवा की तरह कलाकार भी मुक्त होता है. मुझे नहीं लगता कि मैं अपने आप को एक कलाकार कहना पसंद करूंगा. मैं वही रोल स्वीकार करता करता हूं जो मुझे चुनौतीपूर्ण लगता है.

सवाल : श्याम बेनेगल और आपका साथ नियमित रहा है. आपकी कौन सी बात उनको प्रेरित करती है ?
रजित : इसकी सही वजह मुझसे अधिक बेनेगलजी ही बता सकते हैं. मुझे उनके काम करने का तरीका बहुत पसंद है और शायद यही वजह है कि उनके साथ काम करने में मुझे सहजता महसूस होती है. मुझे लगता है वो भी मुझे अच्छी तरह समझते हैं. हमारी आपस की समझदारी भी किरदार को बेहतर बनाने में सार्थक होती है.

सवाल : आज हर कलाकार किसी न किसी मकसद से जुडा हुआ है, क्या आप भी उन्हीं की तरह हैं ?
रजित : मेरे ख़याल से हमारे हाथ में कुछ नहीं होता है. हम सब तो भगवान के हाथ की एक कठपुतली हैं. अगर हमें समाज को कुछ देना है तो वो रास्ता दिखा देता है. जहां तक किसी मकसद की बात है तो ये आपके दिल के बहुत क़रीब होता है. मेरे लिए मैं जो कर रहा हूं उसका अच्छा एहसास होना ज्यादा मायने रखता है.