बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 12:45 GMT तक के समाचार
बीनू जोशी
जम्मू से
जम्मू शहर में एक स्कूल के कुछ छात्र भांगड़ा ग्रुप चला रहे हैं जिससे वे अपनी पढ़ाई के अलावा अपना जेब खर्च भी निकाल रहे हैं.
शादी विवाह का अवसर हो या फिर कोई और निजी कार्यक्रम, ये बच्चे अपने पंजाबी पॉप की थाप पर किसी को भी थिरकने के लिए मज़बूर कर देते हैं.
जम्मू में भांगड़ा ब्वायज़ के नाम से अपना भांगड़ा ग्रुप चला रहे इन 11वीं कक्षा के छात्रों से जब बातचीत की तो पता चला कि ये बच्चे पढ़ाई के साथ ही यह ग्रुप भी चला रहे हैं पर इनकी पहली प्राथमिकता इनकी पढ़ाई ही है.
इस भांगड़ा ग्रुप में कुल 10 लड़के हैं और एक महीने में यह ग्रुप चार कार्यक्रम तो कर ही लेता है.
इस ग्रुप में न तो कोई लीडर है और न ही गाइड, सबका क़द एक बराबर है और सारे फ़ैसले ये आपस में मिलकर लेते हैं.
भांगड़ा ब्वायज़
ग्रुप के एक सदस्य कंवरदीप सिंह ने बताया कि ये लोग पिछले दो वर्षों से यह काम करते आ रहे हैं.
कंवर कहते हैं, "हम लोगों को ऐसा करने में अच्छा लगता है और इससे हम पैसा भी कमा रहे हैं."
पर विश्व प्रसिद्ध भांगड़ा नृत्य में ये बच्चे इतने निपुण कैसे हुए, इस बारे में कंवर बताते हैं, "हमने किसी से इसकी औपचारिक शिक्षा नहीं ली है. बस, स्कूल में कुछ समारोहों में हम हिस्सा लेते रहे और घर पर भी कुछ अभ्यास करते रहे."
ये बच्चे अपनी इस कला को भगवान का तोहफ़ा भी मानते हैं.
पढ़ाई के साथ ऐसा करने का ख़्याल कहाँ से आया, इनमें से अमितपाल सिंह ने बताया, " स्कूल में कार्यक्रम करने के बाद अचानक एक दिन हमारे मन में यह ख़्याल आया कि क्यों न हम पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर होने के भी कुछ अवसर निकालें."
बच्चों को इस बात पर गर्व है कि वह पढ़ाई के साथ ही अपना खर्च भी निकाल रहे हैं और परिवार की भी मदद कर रहे हैं. अच्छी कमाई होने पर बच्चे कुछ पैसा अपने घरों में भी देते हैं.
इस पैसे का इस्तेमाल उनकी स्कूल और ट्यूशन की फ़ीस के लिए भी हो जाता है. परिवार के सदस्य भी बच्चों के इस क़दम से सहमत हैं.
एक बच्चे के पिता ने हमें बताया कि रोज़गार के अवसर तलाशने और अपना भविष्य बनाने के लिए डॉक्टर या इंजीनियर बनना ही एकमात्र रास्ता नहीं है. अगर बच्चे इस कला को अपना भविष्य बनाना चाहते हैं तो इसमें ग़लत क्या है.