शुक्रवार, 17 फ़रवरी, 2006 को 04:05 GMT तक के समाचार
मोहम्मद फ़ैसल अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
कभी ‘अटल बिहारी वाजपेयी फैन क्लब’ के प्रमुख सदस्य रहे बल्कि उसके गठन में अहम भूमिका निभाने वाले भोपाल के दो उर्दू शायर बशीर बद्र और मंज़र भोपाली में इन दिनों जबरदस्त ठनी हुई है.
मामला इतना बढ़ा है कि बात पुलिस थाने तक पहुँच गई है.
हालांकि इस झगड़े को देख रहे दूसरे शायरों का कहना है कि यह सत्ता और उससे मिलने वाले लाभ की होड़ का झगड़ा है.
इस समय मध्यप्रदेश में उसी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जिसके ये दोनों शायर हिमायती रहे हैं.
मामला
यह सब शुरु हुआ एक पोस्टर से जो भोपाल में जगह-जगह चिपकाया गया है.
इस पोस्टर में बशीर बद्र पर ‘देशद्रोह’ का इलज़ाम लगाया गया है.
उर्दू अदब के बड़े शायरों में शुमार होने वाले बशीर बद्र ने आरोप लगाया है कि दूसरे शायर मंज़र भोपाली शहर में उन पोस्टरों को लगवाने के पीछ हैं.
बशीर बद्र ने इस मामले में मंज़र भोपाली के ख़िलाफ़ एक रिपोर्ट भी पुलिस में दर्ज कराई है.
बशीर बद्र की तस्वीर को दर्शाते हिंदी में छपे इस पोस्टर में देशवासियों, बुद्धिजीवियों और राजनीतिज्ञों से यह सवाल पूछा गया है कि ‘मुल्क में देश की बर्बादी की दुआ माँगने वाले इस शायर के बारे में’ उनके विचार क्या हैं?
मंज़र भोपाली ने सिरे से इंकार किया कि उनका इस पोस्टर से कुछ वास्ता है.
मगर वह इस बात को बार-बार दुहरा रहे हैं कि बद्र साहब ने कई साल पहले दुबई के एक मुशायरे में ऐसा दसियों शायरों और हज़ारों आम लोगों के सामने स्टेज से कहा था.
पुराने भोपाल में जगह-जगह पर चिपके इन पोस्टरों में लोगों को साहित्य पत्रिका लफ्ज़, इंडिया टुडे और पाञ्चजंय ‘देखने’ की सलाह दी गई है.
पिछले माह ही पाञ्चजंय में मौजूद एक लेख में आरोप लगाया गया है कि ‘भाजपा शासित मध्यप्रदेश की उर्दू अकादमी के अध्यक्ष बशीर बद्र ने मक्का में हिंदुस्तान की बर्बादी माँगी.’
इसी लेख के नीचे सुप्रसिद्ध उर्दू शायर मुनव्वर राना का भी एक साक्षात्कार है जिसमें उन्होंने न सिर्फ़ बद्र साहब के बयान को अपनी मौजूदगी में दिया गया बयान बताया है, बल्कि यह भी कहा है कि ‘यदि इस्लामी क़ानून द्वारा इस पर फ़तवा किया जाएगा तो उसमें बशीर को सज़ा-ए-मौत का आदेश होगा.’
बेबुनियाद
उधर बशीर बद्र ने कहा है कि उन पर लगाए जा रहे ये सारे आरोप वेबुनियाद हैं और महज़ चंद लोगों की कारिस्तानी का नतीजा है.
इस पर दूसरे गुट का कहना है कि अगर शक है तो इस पूरे मामले की जाँच करा ली जाए.
मंज़र भोपाली ने तो पुलिस स्टेशन जाकर पद्मश्री बशीर बद्र के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने के लिए दरख्वास्त दी.
कभी काँग्रेस पार्टी के क़रीबी समझे जाने वाले मंज़र भोपाली पिछले आम चुनावों से पहले बीजेपी के साथ हो लिए थे और बशीर बद्र और अन्य लोगों के साथ मिलकर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक फैन क्लब बनाया था.
अदब से जूड़े कई ‘तटस्थ’ शायर इस पुरे झगड़े पर इतना ही कहते हैं कि 'यह 21वीं सदी में अदब और उससे जुड़े चंद लोगों की गिरावट की क मिसाल है'.
शायर और लेखक नासिर कमाल इस पूरे मामले को शायरों, साहित्यकारों द्वारा राजनीतिज्ञों से करीब होकर उसका लाभ और उसके बंटबारे पर हुए झगड़े के तौर पर देखते हैं.
वे कहते हैं, "भाजपा से क़रीब आकर देश की बड़ी उपाधियाँ जीत लीं और मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के कर्ताधर्ता भी बन गए जबकि औरों के हाथ इतनी मलाई नहीं आई."
मगर कुछ लोग इसे बद्र साहब के उस बयान से भी जोड़कर देखते हैं जिसमें उन्होंने ख़ुद को मीर और ग़ालिब से बड़ा शायर बताया था फिर उस वक्तव्य से जिसमें उन्होंने कहा कि वे ऐसे अदाकार हैं जो शैतान से लेकर पैग़ंबरों के किरदार निभा सकते हैं.
उनके इस बयान से उर्दू साहित्यकारों और मुस्लिम समाज के बड़े-वर्ग में खासा रोष रहा है.