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मंगलवार, 03 जनवरी, 2006 को 13:42 GMT तक के समाचार

दुनिया के सात नए अजूबे कौन से?

दुनिया के सात अजूबे हर किसी के लिए हमेशा ही दिलचस्पी का केंद्र रहते हैं और सात अजूबों को अपनी राय के ज़रिए चुनने के लिए इस बार लोगों मौक़ा भी मिल रहा है.

स्विटज़रलैंड के एक निजी संगठन - द न्यू 7 वंडर्स फ़ाउंडेशन यानी नए सात आश्चर्य संस्थान ने दुनिया भर से 21 अजूबों को चुना है जिनमें से लोगों को मतदान के ज़रिए सात अजूबों को चुनने का मौक़ा दिया जा रहा है.

21 अजूबों की सूची में भारत से सिर्फ़ ताजमहल ने जगह पाई है.

इस संस्थान के सदस्यों में यूनेस्को के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हैं.

साल 2005 में दुनिया भर के अजूबों के बारे में लोगों की राय मांगी गई थी जिनमें से विशेषज्ञों ने 21 को चुना और उनमें से अंतिम रूप से सात को चुना जाएगा और इसके लिए साल 2006 में लोगों की राय ली जाएगी.

21 अजूबों की सूची में ताजमहल, चीन की महान दीवार वग़ैरा शामिल हैं.

लोगों की राय के आधार पर ही दुनिया के सात अजूबों को एक जनवरी 2007 को घोषित किया जाएगा. संस्थान टेलीफ़ोन के ज़रिए लोगों से अजूबों की पसंद बताने के लिए अनुरोध कर रहा है और इस बारे में विस्तृत जानकारी उनकी वेबसाइट पर दी गई है.

इससे जो धन इकट्ठा होगा उसमें से आधी रक़म संस्थान के विरासत को सहेजकर रखने के प्रयासों पर ख़र्च की जाएगी.

आधुनिक अजूबे

इस सूची में आधुनिक काल के भी अनेक अजूबों ने जगह पाई है, मसलन, पेरिस का एफ़िल टॉवर, न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी और सिडनी का ओपेरा हाउस वग़ैरा.

प्राचीन दुनिया के सात अजूबों का चयन एक ग्रीक दार्शनिक फ़िलों ने क़रीब दो हज़ार साल पहले किया था.

उन्होंने जिन अजूबों को चुना था वे सभी भूमध्य क्षेत्र में स्थित थे.

नई सूची में जगह पाने के लिए किसी भी अजूबे का मानव निर्मित होना आवश्यक है और वह धरोहर की 'स्वीकार्य' स्थिति में होना चाहिए.

न्यू सेवन वंडर्स फ़ाउंडेशन का कहना है कि वह इस अभियान को लोगों में सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए चला रहा है.