सोमवार, 19 दिसंबर, 2005 को 12:05 GMT तक के समाचार
कृष्णकांत टंडन
लंदन से
लंदन में अभी तक समझा जाता था कि हिंदी के बाद अगर कोई और भारतीय भाषा लोकप्रिय है तो वह है गुजराती. लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि अब पंजाबी ज़ुबान ने भी अपनी एक अलग पहचान बनानी शुरु कर दी है.
हिंदी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नाटकों, गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों को तो मंच मिला ही है लेकिन वहीं अब पंजाबी के नाटकों के मंचन से भी लंदन के हॉल अछूते नहीं रहे हैं.
इस साल के शुरु में जनवरी से लेकर नवंबर तक पंजाबी के कुछ नाटक बहुत ही लोकप्रिय रहे जिनमें प्रमुख हैं ‘बेटा मस्त कलंदर’, ‘नचदी कुड़ी’ और ‘जवाई राजा’.
बेटा मस्त कलंदर और जवाई राजा जैजैवंती थियेटर की पेशकश हैं जो पिछले 22 सालों से गुजराती नाटकों का मंचन सफतलता पूर्वक करता आ रहा है.
सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष
ये दोनों ही नाटक जहाँ समाज की बुराइयों को उजागर करते हैं वहीं इनके संवादो से हंसी के ठहाके भी गूंजते हैं.
जवाई राजा नाटक में दिखाया गया है कि वर्ष 2050 में बढ़ती आबादी के कारण किस तरह सरकार पाँच साल के लिए शादियों पर रोक लगाने का क़ानून लागू करती है और इसके चलते लड़कियों के मजबूर मँ बाप को लड़के वालों की हर मॉग के आगे झुकना पड़ता है, यहाँ तक कि लड़कों की सरे आम बोलियाँ लगने लगती हैं.
इस नाटक में शुरु से अंत तक हॉल में बैठे लोगों की हंसी नहीं रुकती तो वहीं नाटक के अंत में दो बेटियों के माता पिता की दशा पर लोगों की आँखों में आँसू भी आ जाते हैं.
इस नाटक में नौ कलाकारों ने हिस्सा लिया है जिनको दो को जैजैवंती थियेटर ने पहली बार मंच पर उतारा.
नाटक के प्रमुख कलाकार हैं प्रेम मोदगिल, सुरेद्र मठारु, नाहर सिंह गिल, भारतेंदु विमल, अतुल मोठा, मनजीत जौहल, साईमा क़ुरैशी, अज़ीज़ ज़ुल्फेक़ार और कृष्ण टंडन.
गुजराती नाटकों को मंचित करने वाले जैजैवंती थियेटर की संस्थापक और लंदन के थियेटर जगत की एक जानीमानी हस्ती हिना बख़्शी ने इन नाटकों का निर्देशन किया.
हिना बख़्शी का कहना है, "लंदन में पंजाबी थियेटर की इस लोकप्रियता से मैं बहुत उत्साहित हूँ और मेरा प्रयास रहेगा कि इस भाषा के प्रशंसकों को कुछ और अच्छी रचनाओं से परिचित कराया जाए".
उनका कहना है कि वह इस बात का भी इरादा कर रही हैं कि कुछ नए, प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन का मौक़ा दें.
लंदन और उसके आस पास इन दोनों नाटकों के अब तक 30 शो हो चुके हैं.