बुधवार, 30 नवंबर, 2005 को 13:25 GMT तक के समाचार
नादिया परवेज़
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
फ़िल्में समाज का आईना कही जाती हैं और माना जाता है कि इन्हीं फ़िल्मों के माध्यम से समाज में पनपने वाले सामाजिक मुद्दों को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की जाती है.
इसी कोशिश के तहत निर्देशक प्रकाश झा ने बिहार के ‘अपहरण उद्योग’ पर एक फ़िल्म बनाई है.
इस फ़िल्म में बिहार में अपहृत होने वालों और अपहरण करने वालों के बीच पैदा होने वाले एक अजीब और बदसूरत रिश्ते को दिखाने की कोशिश की गई है.
बिहार भारत के ऐसे राज्यों में आता है जहाँ ग़रीबी, अराजकता है और सुशासन का अभाव है. साथ ही यहाँ अपराध और मुजरिमों का बोल बाला है.
जैसा कि प्रकाश झा कहते हैं, राज्य में किसी बड़े उद्योग की शुरूआत करना तो संभव नहीं है लेकिन यहाँ एक उद्योग कई सालों से अपनी जड़े फैलाए हुए है और वो है 'अपहरण उद्योग'.
अपहरण उद्योग यानी कभी भी किसी को भी और कहीं से भी लोगों को फ़िरौती के लिए उठवा लेना और फ़िरौती की रक़म के न मिलने पर उन्हें मार देना.
नई बिपाशा
निर्देशक प्रकाश झा अपनी नई फ़िल्म के बारे में कहते हैं, "फ़िल्म की पृष्ठभूमि अपहरण उद्योग है और एक बेटे और उसके बाप की कहानी है. जहाँ एक तरफ पिता के उसूल हैं और दूसरी तरफ उसकी औलाद. इसमें दिखाया गया है कि कैसे पिता के उसूलों की वजह से उसके बेटे की ज़िंदगी एक नया मोड़ ले लेती है और वह जुर्म की दुनिया में शामिल हो जाता है."
फ़िल्म में अजय देवगन, बिपाशा बसु और नाना पाटेकर अपनी कलाकारी के जौहर दिखा रहे हैं.
फ़िल्म में बिपाशा बसु एक सीधी सादी लड़की के रूप में बड़े पर्दे पर नज़र आएँगी यानि बिपाशा छोटे छोटे कपड़ों के बजाए आम घरेलू लड़कियों की तरह सलवार सूट और साड़ी पहने दिखाई देंगी.
अपनी इमेज को बदलने के लिए आतुर बिपाशा का कहना है कि इस किरदार को निभाने में उन्हें कोई परेशानी नहीं आई.
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए बिपाशा ने कहा, "जब फ़िल्म के निर्देशक को अपने विषय की जानकारी होती है तो कलाकार का काम बेहद आसान हो जाता है."
बिपाशा को उम्मीद है कि उनका नया रूप लोगों को ज़रूर पसंद आएगा.
अजय देवगन प्रकाश झा की पिछली फ़िल्म ‘गंगाजल’ में भी हीरो थे.
इस फ़िल्म में वह एक ऐसे नौजवान का किरदार अदा कर रहे हैं जो बेरोज़गारी और राजनीति की वजह से अपहरण उद्योग की तरफ रूख़ कर लेता है.
अजय कहते हैं, "बिहार के बारे में जितना हम जानते और सुनते हैं वहाँ के हालात उससे कहीं ज़्यादा खराब हैं."
बिहार में चंपारण ज़िले के बेतिया में अपहरण के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं.
प्रकाश झा इसी इलाके के हैं और यहीं से उन्होंने 2004 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था.
उनकी फ़िल्म दो दिसंबर को रिलीज़ हो रही है.