गुरुवार, 24 नवंबर, 2005 को 21:25 GMT तक के समाचार
दक्षिण भारतीय फ़िल्मों की अभिनेत्री खुशबू के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों के दौरन हिंसा रोकने के लिए भारत के राज्य तमिलनाडु की हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं.
कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वो इस बारे में एक रिपोर्ट सौंपे कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने के लिए वो क्या क़दम उठा रही है.
हाई कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से कहा है कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ उठाए गए ‘उचित क़दमों’ पर वे एक बयान लिख कर दें.
मानवाधिकार संगठन के एक कार्यकर्ता ने याचिका दायर की थी कि प्रदर्शनकारी सावर्जनिक व्यवस्था भंग कर रहे हैं.
विरोध प्रदर्शन
विवाह पूर्व यौन संबंधों को लेकर दिए बयानों के चलते खुशबू विवाद के घेरे में है और उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए हैं.
उन्होंने कहा था कि लड़को को यह उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि उनकी होने वाली पत्नी कुंवारी हो.
इसके बाद से तमिलनाडु में खुशबू के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और उनके पुतले जलाए गएँ हैं.
तमिलनाडु की कई अदालतों में भी शिकायतें दायर की गई हैं जिनमें कहा गया है कि खुशबू के बयानों से तमिलों को भारी ‘आघात’ पहुँचा है और उन्हें सज़ा होनी चाहिए.
हाल ही में उन्हें तमिलनाडु की एक अदालत में पेश किया गया था. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने खुशबू पर चप्पलें, अँडें और टमाटर फेंके और अभद्र भाषा का प्रयोग किया.
अभिनेत्री से राजनेता बनी राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी खुशबू के बयान पर अपनी असहमति जताई है और कहा है कि ‘ये तमिल संस्कृति के ख़िलाफ़ है’.
तमिल फ़िल्म उद्योग के ज़्यादातर लोगों ने इस मामले में चुप्पी साधी हुई है लेकिन अभिनेत्री सुहासिनी ने कहा है कि खुशबू को वो बात बोलने का हक़ है जो वो कहना चाहती हैं.
सुहासिनी फ़िल्म निर्माता मणि रत्नम की पत्नी हैं.