http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 02 सितंबर, 2005 को 14:27 GMT तक के समाचार

शक्ल और अक़्ल का संगम

राहुल बोस की छवि एक ऐसे अभिनेता की है जो गंभीर, बुद्धिजीवी सिनेमा से जुड़ा है. और मल्लिका शेरावत का नाम लेते ही लोगों के ज़हन में आता है, सेक्स सिंबल.

यानी, इन दोनों का साथ ऐसा ही है जैसा 36 का आँकड़ा.

लेकिन रोमांटिक कॉमेडी 'प्यार के साइड इफ़ेक्ट्स' में आप इन दोनों की जोड़ी देखने जा रहे हैं.

फ़िल्म का निर्देशन कर रहे हैं साकेत चौधरी जो 'अशोका' में संतोष सिवान के सहायक रहे हैं.

राहुल बोस कहते हैं, "मैं पहली बार इस तरह का रोल कर रहा हूँ और मुझे बहुत मज़ा आ रहा है".

मल्लिका के साथ अपनी जोड़ी के बारे में राहुल का कहना है, "जब मैंने चमेली में करीना के साथ काम करने की हामी भरी तब भी लोगों को बड़ा अजीब लग रहा था".

वह कहते हैं कि उन्हें यक़ीन है कि मल्लिका के साथ काम करना भी एक अच्छा अनुभव रहेगा.

* * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * *

एक और वापसी

मीनाक्षी शेषाद्रि तो आपको याद होंगी ही. 'दामिनी' में ख़ुद को एक बेहतरीन अभिनेत्री साबित करने वाली मीनाक्षी ने शादी के बाद फ़िल्मों को अलविदा कह दिया था.

वह अमरीका में जा बसीं जहाँ वह अपने पति और दो बेटों के साथ बहुत ख़ुश भी हैं और व्यस्त भी.

लेकिन कहते हैं न कि रुपहले परदे का मोह कभी न कभी सिर उठा ही लेता है.

अभी हाल ही में मुंबई में कुछ पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन्हें ऐसे ऑफ़र मिलते हैं जिनमें कुछ कर दिखाना हो तो वह विचार करने को तैयार हैं.

लेकिन उनका कहना है कि वह जून से अगस्त तक ही काम कर पाएँगी जब उनके बच्चों के स्कूल बंद होते हैं.

मीनाक्षी अमरीका में अपना नृत्य स्कूल चला रही हैं और समय-समय पर स्टेज पर प्रदर्शन भी करती रहती हैं.

इसके अलावा वह एक प्रशिक्षित शास्त्रीय गायिका भी हैं और जल्दी ही उनकी संगीत ऐलबम आने वाली है.

* * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * *

राखी का उपहार

विवेक ओबेरॉय ने अंडमान-निकोबार प्रायद्वीप में सुनामी से प्रभावित लोगों के लिए बहुत काम किया था.

उनका कहना है कि उन्हें न तो कभी प्रचार की तमन्ना हुई और न ही ईनाम की.

लेकिन उन्हें एक ईनाम मिल ही गया जो उनके शब्दों में अनमोल है.

रक्षा बंधन के मौक़े पर इस द्वीप में बसी कुछ लड़कियों ने विवेक को राखी बाँधने की इच्छा ज़ाहिर की.

एक ग़ैर सरकारी संगठन आगे आया और उसने सात लड़कियों को मुंबई लाने की ज़िम्मेदारी ले ली.

राखी बंधवाते समय विवेक भावुक हो गए और उनका कहना था कि यह उनके जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण है.

वह कहते हैं कि अगर उनकी वजह से उन लड़कियों के चेहरे पर मुसकुराहट आ पाई तो यही उनके लिए बहुत बड़ा तोहफ़ा है.