मंगलवार, 26 जुलाई, 2005 को 18:07 GMT तक के समाचार
अरुण अस्थाना
मुंबई से
हनुमान जी अब एक नए रूप में सामने आ रहे हैं. उनका ये नया रूप होगा – एनिमेशन स्वरूप में.
यूँ तो हनुमान जी परदे पर अब तक कई बार दिख चुके हैं लेकिन इस रूप में पहली बार वह ‘हनुमान’ में ही प्रकट होंगे.
बजरंग बली पर केंद्रित ये पहली एनिमेटेड फिल्म है.
‘हनुमान’ में चालीस से ज़्यादा पात्र हैं. इसमें कहानी मुख्य रूप से हनुमानजी के बाल रूप की है. उनके जन्म से और बड़े होने तक.
हालाँकि इस जीवनगाथा में उनके बालकाल के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सेना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की गाथा भी कम महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन इसे एक तरह से एडवेंचर ऑफ बेबी हनुमान कहना ज़्यादा ठीक होगा.
फ़िल्म में हनुमान का जन्म शिव के अवतार के रुप में दिखाया गया है जो पृथ्वी पर केवल बुराई के ख़िलाफ़ राम के युद्ध में मदद देने के लिए अवतरित हुए.
भारत की पहली एनिमेटेड फ़िल्म बनाने के लिए हनुमान ही क्यों? इस सवाल के जवाब में परसेप्ट पिक्चर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील सहजवानी कहते हैं, "हमारा बैकग्राउंड मारकेटिंग का है. हमने पता किया कि लोग क्या चाहते हैं, हमने पता किया कि क्या बनाया जाए और आर्थिक तौर पर क्या फ़ायदेमंद है और सामाजिक तौर पर प्रासंगिक भी."
फ़िल्म के निर्देशक वसंत गजानन सावंत कहते हैं, "इस फ़िल्म का मुख्य उद्देश्य बच्चों का मनोरंजन और शिक्षा है. हनुमान जैसा चरित्र बच्चों को सदा लुभाता रहा है और उनका बड़ा प्रिय रहा है. उनके चरित्र और व्यवहार में वे सारे मूल्य और गुण थे जिसे आज भी लोग अपने बच्चों में देखना चाहते हैं."
रिकार्ड का दावा
उनका दावा है कि ये फ़िल्म बजरंगबली के व्यक्तित्व और व्यवहार का संपूर्णता में चित्रण करती है. इसलिए बच्चे ही नहीं बड़े भी इसे ख़ूब देखेंगे. लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की बात मानी जाए तो ये फ़िल्म भारत की पहली पूरी स्वदेशी एनिमेटेड फ़िल्म है.
हनुमान के साहस और शौर्य को दिखाने वाली इस फ़िल्म में केवल एनिमेशन ही नहीं इसके साउंडट्रैक में भी चर्चा का विषय बनने के सभी गुण नज़र आते हैं.
हनुमान के लिए ‘शक्तिमान’ और ‘भीष्म पितामह’ मुकेश खन्ना ने अपनी भारी भरकम आवाज़ दी है तो बाकी एनिमेटेड पात्र ‘अल्ला के बंदे...’ वाले कैलाश खेर, शान, पलाश सेन, मधुश्री, सपना मुखर्जी और स्नेहा पंत जैसे कलाकार सुरों के जादूगरों की आवाज़ में बोलते सुनाई देंगे.
क़रीब 100 मिनट की इस फ़िल्म को बनाने के लिए दो लाख से ज़्यादा चित्रों का इस्तेमाल किया गया और इसमें दो साल से ज्यादा का समय लगा है.
परसेप्ट पिक्चर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील सहजवानी कहते हैं कि ‘हनुमान को कुछ इस तरह बनाया गया है कि इसे बच्चे आसानी से समझ सकें और उन्हें पता चले कि हनुमान में क्या गुण थे.’
इस फ़िल्म के निर्देशक वसंत गजानन सावंत है और वह पिछले छह साल से इस फ़िल्म काम कर रहे थे.
वसंत गजानन सावंत को भारत के एनिमेशन जगत में ख़ासा नाम हासिल है. लॉस एंजिल्स की कई नामी कंपनियों के लिए वो एनिमेशन तैयार कर चुके हैं. 1959 में भारत सरकार के फ़िल्म्स डिवीज़न में बतौर कार्टून आर्टिस्ट अपना करियर शुरु करने वाल सावंत ने बाद में अपने दम पर कई एनिमेटेड फ़िल्में बनाईं.
उन्हें 1978 में ‘लॉ ऑफ नेचर’ नाम की फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फ़िल्म का देश का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.
1984 में उनकी एनिमेशन फिल्म ‘प्रिसीशस वॉटर’ को पुर्तगाल में पुरस्कार भी मिला.