सोमवार, 27 जून, 2005 को 16:29 GMT तक के समाचार
दुनिया में ज़्यादा किताब पढ़ने वालों में भारत का नाम सबसे ऊपर है जहां लोग औसतन एक हफ्ते में 10.7 घंटे पढ़ते हैं.
एनओपी वर्ल्ड कल्चर स्कोर इंडेक्स ने तीस देशों के तीस हज़ार लोगों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला है.
हालांकि ज़्यादा समय किताबों को देने का मतलब है टीवी और रेडियो को समय कम देना और इस क्षेत्र में भारत नीचे से चौथे नंबर पर है.
एनओपी के सर्वे में चीन दूसरे नंबर पर है और फिलीपींस तीसरे नंबर पर.
ब्रिटेन और अमरीका के लोग प्रति सप्ताह औसतन पांच घंटे पढ़ते हैं जबकि जापानी करीब चार घंटे और कोरिया के लोग सप्ताह में सिर्फ़ तीन घंटे ही पढ़ते हैं.
सामाजिक बदलाव
देश भर में पुस्तक की दुकानें चलाने वाली कंपनी क्रॉसवर्ड्स बुकस्टोर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर श्रीराम का कहना है कि भारत के लोग पढ़ने में बहुत रुचि रखते हैं.
बीबीसी वेबसाइट से बातचीत में उन्होंने कहा " भारतीय पढ़ने पर बहुत ज़ोर देते हैं. यही कारण है कि वो शिक्षा और विदेशी यूनिवर्सिटियों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं. "
उन्होंने कहा " लोग पढ़ते हैं क्योंकि इससे उनके जीवन में बदलाव आता है. खुद को क़िताबों के ज़रिए जानकार बनाने की प्रक्रिया अपनाते हैं भारत के लोग."
श्रीराम कहते हैं कि क़िताबों से भारत में एक स्तर पर सामाजिक बदलाव हो रहा है. पहले लोग सलाह के लिए अपने माता पिता या बुजुर्गों के पास जाते थे लेकिन अब क़िताबों से प्रेरणा ली जा रही है.
हालांकि भारत के लेखक और संपादक तरुण तेजपाल का मानना है कि इस सर्वे का तभी कोई मतलब है जब इसमें से अनपढ़ भारतीय लोगों की संख्या को निकाल दिया जाए.
राष्ट्रीय रीडरशिप सर्वे के अनुसार भारत के ग्रामीण इलाक़ों में एक तिहाई से अधिक लोग अनपढ़ हैं जबकि शहरों मे अभी भी 15 प्रतिशत लोगों को पढ़ना लिखना नहीं आता है.
तेजपाल कहते हैं कि क़िताब पढ़ने का एक मामला स्कूल और कॉलेज में दाखिला लेने से भी जुड़ा रहता है. इस तरह की पढ़ाई जबरन होती है न कि शौकिया.
जाने माने स्तंभकार वेंकटेश्वर राव ने ब्रिटेन के संडे टाइम्स अख़बार से कहा कि वो भारत में लोगों को किताब की दुकानों में जाते हुए नहीं देखते हैं.
वो कहते हैं " लोगों में पढ़ने की आदत वैसी नहीं है जैसी अमरीका या ब्रिटेन में है. भारत में लोग ज़रुरत के हिसाब से या कहिए मजबूरी में पढ़ते हैं. "
ब्रिटेन या अमरीका में क़िताबें पढ़ना सामाजिक स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर आपने कोई ऐसी किताब नहीं पढ़ी जो शीर्ष दस किताबों में हो तो आप सामाजिक रुप से पिछड़े माने जाते हैं.
इस सूची में भारत के ऊपर आने से टीवी और रेडियो की सूची में वो पिछड़ गया है.
टीवी देखने में सबसे ऊपर है थाईलैंड का नाम जबकि रेडियो सुनने में सबसे ऊपर हैं अर्जेन्टीना वासी.