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रविवार, 02 जनवरी, 2005 को 10:16 GMT तक के समाचार

क्रिस हॉग
बीबीसी संवाददाता, ताइपे

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत तैयार

क्या आप बता सकते हैं कि दुनिया की सबसे ऊंची छत पर कैसा लगता है.

नए साल की पूर्व संध्या पर मुझे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत पर चढ़ने का मौका मिला और मैं बता सकता हूं कि वहां आपका स्वागत तेज़ हवाएं करती हैं.

मज़ेदार बात ये होती है कि इतनी ऊंचाई से नीचे देखने में आपको शायद ही आनंद आए.

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत ताइपे 101 को नए साल की पूर्व संध्या पर खोला गया और जाने वालों में शामिल था मैं भी.

508 मीटर लंबी और 101 तलों वाली इस इमारत ने मलेशिया के पेट्रोनास टॉवर का रिकार्ड तोड़ा है. ताइपे 101 पेट्रोनास से 50 मीटर अधिक ऊंची है.

ऐसी इमारत की चोटी पर पहुंचने के लिए दुनिया की सबसे तेज़ लिफ्ट का भी इस्तेमाल करना पड़ता है जो 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है.

इमारत के 89वें तल तक पहुंचने में लिफ्ट को लगते हैं सिर्फ 37 सेकेड.

चीनी प्रतीक

ताइपे 101 चीन का प्रतीक है और इसके मालिक ताइपे फाइनेंशियल कारपोरेशन का कहना है कि यह बांस को याद करने की कोशिश है.

कारपोरेशन के सहायक उपाध्यक्ष कैथी यंग कहती हैं " चीनी लोगों को बांस पसंद है क्योंकि यह लचीला लेकिन काफी मज़बूत होता है. "

कैथी का कहना था " बांस अंदर से खोखला होता है. चीनी दर्शन बताता है कि खोखले बांस से चीनीयों को भीतर से विनम्र होना चाहिए."

लेकिन इस इमारत को बनाने का काम इतनी विनम्रता से पूरा नहीं हुआ. ताइपे के राष्ट्रपति चेन शुइ बियान ने इमारत में कुछ तल बढ़ाने के लिए दबाव डाला था ताकि इसे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनाई जा सके.

कैथी बताती है कि ताइवान ने पिछले 40 सालों में बहुत कुछ पाया है लेकिन दुनिया ताइवान का उतना सम्मान नहीं करती है.लेकिन अब इस इमारत के कारण दुनिया भर के लोग हमारे बारे में जान जाएंगे.

ताइपे 101 को दनिया की सबसे ऊंची इमारत के रुप में मान्यता दी गई है लेकिन इमारत के ऊपर टावर और अन्य चीज़ो को जोड़ लें ताइपे से ऊंची इमारत भी दुनिया में है.

वो है कनाडा का सीएन टावर्स.

भूकंप रोधी प्रणाली

दुनिया की यह इमारत ऐसे क्षेत्र में है जहां भूकंप का खतरा रहता है लेकिन चिंता नहीं.

इमारत बनाने वालों ने भूकंप के झटके सहने की व्यवस्था बिल्डिंग के भीतर की है.

इसके भीतर 92वें तल पर 606 मीट्रिक टन का धातु का गोला लटकाया गया है और विशेषज्ञों के अनुसार इससे इमारत को तेज़ हवा के झोंके और भूकंप के झटके सहने में आसानी होगी.