मंगलवार, 31 अगस्त, 2004 को 12:42 GMT तक के समाचार
क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देने की कर्नाटक सरकार की नई नीति के विरोध में राज्य के सिनेमा मालिकों ने हड़ताल कर रखी है और दो दिनों से सिनेमाघर बंद हैं.
इस नीति के तहत जो फ़िल्म राज्य की राजभाषा कन्नड़ में न बनी हो उसे देश भर में फ़िल्म रिलीज़ होने के सात हफ़्तों बाद ही कर्नाटक के सिनेमाघरों में दिखाया जा सकता है.
इसमें तमिल, तेलुगू, अंग्रेज़ी के अलावा हिंदी की फ़िल्में भी शामिल हैं.
सिनेमा मालिकों का कहना है कि सिर्फ़ कन्नड़ भाषा में बनी फ़िल्मों से उनका व्यवसाय नहीं चल सकता.
कन्नड़ फ़िल्म प्रोड्यूसर एसोसिएशन की मांग पर सरकार ने क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए यह प्रतिबंध लगाया है.
एसोसिएशन ने लोकप्रिय फ़िल्म अभिनेता राजकुमार को अपने साथ लेकर सरकार पर दबाव बनाया और उन्हें सफलता भी मिली.
विरोध
हालांकि सिनेमा मालिकों ने इसका विरोध किया था लेकिन सरकार ने नई नीति की घोषणा कर दी.
उनका कहना है कि यदि कर्नाटक में फ़िल्में देश के बाक़ी हिस्सों के बाद जारी होंगी तो इससे फ़िल्मों के नकली वीडियो और सीडी के धंधे को बढ़ावा मिलेगा.
कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में 30 प्रतिशत आबादी कन्नड़ भाषा बोलती है और वहाँ दूसरी भाषाओं की फ़िल्में ज़्यादा व्यवसाय करती हैं.
दूसरी ओर तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में लगी सीमा में रहने वाले लोगों में से भी बड़ी संख्या में लोग पड़ोसी राज्यों की ही भाषा बोलते समझते हैं.
सिनेमा मालिकों का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध से राज्य को हर साल कोई लगभग 32 करोड़ रुपयों का नुक़सान होगा.
बंगलौर के रेक्स सिनेमा के रवि कपूर का कहना है कि यह प्रतिबंध लोगों के व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है.
उनका कहना था, "लोग अपनी पसंद से फ़िल्में देखने जाते हैं हम उन्हें नहीं बता सकते कि उन्हें किस भाषा की और कौन सी फ़िल्म देखनी चाहिए."
दूसरी ओर मशहूर अभिनेता और निर्माता निर्देशक गिरीश कार्नाड ने कहा है कि बजाय इस तरह के प्रतिबंध लगाने के कन्नड़ फ़िल्म निर्माताओं को अच्छी फ़िल्में बनानी चाहिए.
राज्य सरकार की इन नीति के चलते लगे प्रतिबंध के बाद से राज्य में पिछले एक पखवाड़े से कोई नई फ़िल्म रिलीज़ नहीं हुई है.
कर्नाटक फ़िल्म्स चेंबर ऑफ़ कॉमर्स ने सिनेमा मालिकों और प्रोड्यूसरों के बीच समझौता कराने की पहल की है.