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मंगलवार, 24 अगस्त, 2004 को 11:38 GMT तक के समाचार

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी मुंबई संवाददाता

एड्स पर पहली हिंदी फ़िल्म तैयार

एड्स जैसे संवेदनशील विषय पर बॉलीवुड की पहली फ़ीचर फ़िल्म इस शुक्रवार को भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है.

'फिर मिलेंगे' एक ऐसे विषय का चित्रण है जिस पर खुल कर बात करना अब भी बहुत आम बात नहीं है.

इस फ़िल्म के विषय चयन पर संयुक्त राष्ट्र ने इसकी भरपूर सराहना की है.

मुंबई फ़िल्मोद्योग में अब तक यह विषय अछूता रहा है लेकिन यह एक सुखद आश्चर्य था कि कई बड़े सितारों ने फ़िल्म में काम करने की हामी भरदी.

फ़िल्म का निर्देशन अभिनेत्री से निर्देशक बनीं रेवती मेनन ने किया है और यह फ़िल्म एक कामकाजी महिला तमन्ना के इर्दगिर्द घूमती है जो किरदार मशहूर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने निभाया है.

फ़िल्म में उनके पति सलमान ख़ान एचआईवी पॉज़िटिव दिखाए गए हैं और अनजाने में अपनी पत्नी को भी इससे संक्रमित कर देते हैं.

'फिर मिलेंगे' में इस बात का सजीव चित्रण है कि कैसे इस रोग का पता चलने पर दफ़्तरों में भय का माहौल पैदा हो जाता है और भेदभाव बरता जाने लगता है.

अभिषेक बच्चन इसमें एक वकील का रोल कर रहे हैं जो तमन्ना को अपने अधिकारियों के ख़िलाफ़ अदालत में मुक़दमा चलाने में मदद देता है.

रेवती का कहना है कि एड्स को लेकर अब भी भारत में एक तरह का ठप्पा लगा हुआ है.

उनका कहना है, "मैंने एचआईवी पॉज़िटिव लोगों के साथ भेदभाव के अनेक क़िस्से सुने हैं और हर दास्तान दूसरी से बदतर है".

उनका कहना है, "फ़िल्म का संदेश यह है कि जीने का मतलब सिर्फ़ साँस लेना नहीं है बल्कि उस तरह से ज़िंदगी गुज़ारना है जैसी आप चाहते हैं".

रेवती अपने गृहनगर चेन्नई में एड्स से बचाव के कार्यक्रम के साथ जुड़ी हुई हैं.

दक्षिण एशिया में यूएनएड्स की प्रवक्ता डॉक्टर एमिला थिम्पो का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र इस फ़िल्म को सहायता दे रहा है ताकि यह ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँच सके.

उनका कहना है कि इस पर भी विचार हो रहा है कि क्या इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी बनाया जा सकता है.

भारत में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ से ज़्यादा लोग फ़िल्में देखते हैं. भारत में एचआईवी से संक्रमित लोगों की तादाद पचास लाख है जो कि दक्षिण अफ़्रीका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है.