मंगलवार, 27 जुलाई, 2004 को 16:21 GMT तक के समाचार
आमतौर पर दफ़्तरों में गप्पबाज़ी या गॉसिप को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता. लेकिन रूस इस मायने में अलग है.
वहाँ इस बात पर कोई रोक या पाबंदी नहीं है कि बॉस के सेक्रेट्री से रोमांस पर टिप्पणी न की जाए.
लेकिन रूस में दफ़्तर की संस्कृति यहाँ तक ही सीमित नहीं है.
कभी-कभी वह व्यावहारिक भी हो जाती है.
नेओनिला समूखीना ने इसी विषय पर एक किताब लिखी है-कर्मचारियों के लिए कामसूत्र.
अभी हाल ही में प्रकाशित हुई इस किताब में उन्होंने कई ऐसी जगहों का ज़िक्र किया है जहाँ रूस के उद्योगपति यौन संबंध क़ायम किया करते हैं.
कई अलग तरीक़े
और यह सब कुछ सिर्फ़ टॉयलेट में ही नहीं होता है.
ऐसी 'गतिविधियों' लिए लिफ्ट, बिलियर्ड की मेज़ या बड़े से प्यानो का भी इस्तेमाल किया जाता है.
समूखीना का कहना है दोपहर के खाने का बहाना करके इस सब के लिए जाना अब एक घिसीपिटी बात हो गई है.
किताब का प्रकाशन सेंट पीटर्सबर्ग के संभोग संस्थान ने किया है और समूखीना स्वंय को संभोग का विशेषज्ञ मानती हैं.
अपनी किताब के लिए सामग्री जमा करने के दौरान समूखीना कई अलग-अलग दफ़्तरों और कंपनियों में गईं.
उन्होंने कई 'अंतरंग' सवाल पूछे और उन्हें जो कुछ सुनने को मिला वह बड़ा ही मौलिक था.
उन्होंने पाया कि सेंट पीटर्सबर्ग के दफ़्तरों में टॉयलेट में यौन संबंध क़ायम करना कोई अनहोनी बात नहीं है.
कर्मचारियों के लिए कामसूत्र बड़ी हलकी फुलकी शैली में लिखी गई है.
समूखीना कहती हैं, "सोवियत संघ के युग में सेक्स पर बात करना पूरी तरह वर्जित था और रूस में अब भी इस पर खुल कर चर्चा करने का रिवाज नहीं है".
"अपनी इस किताब के ज़रिए मैं लोगों को इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित कर रही हूँ कि उनके आसपास हो क्या रहा है".
किताब में तस्वीरों की भरमार है और यह तस्वीरें अलग-अलग कंपनियों में खींची गई हैं.
समूखीना का कहना है कि दफ़्तर में यौन संबंधों को ग़लत ठहराने से कोई फ़ायदा नहीं है और इसीलिए उसे सकारात्मक नज़रिए से देखने की ज़रूरत है.
"रूस के लोग अपना काफ़ी समय दफ़्तर में गुज़ारते हैं. कई के लिए तो दफ़्तर दूसरा घर हो कर रह गया है और इसलिए उससे काफ़ी कुछ निजी जुड़ गया है".
"मैं रूस के उद्योगपतियों और दफ़्तरों के मालिकों की तनावपूर्ण ज़िंदगी में सुकून के कुछ लम्हे लाना चाहती हूँ".
नेओनिला समूखीना की अगली किताब होगी 'सड़क पर यौन मुद्राओं की एटलस'.