गुरुवार, 15 जुलाई, 2004 को 16:08 GMT तक के समाचार
लाहौर से आयशा अकरम
पाकिस्तान में मॉडलिंग करनेवाली युवतियाँ अब धीरे-धीरे फ़ैशन की दुनिया में क़दम जमाती जा रही हैं.
अब पाकिस्तानी मॉडलें अंतरराष्ट्रीय फ़ैशन शो में कैटवॉक करती भी दिख रही हैं और विदेशी पत्रिकाओं के कवर पर भी उनके चेहरे नज़र आने लगे हैं.
लेकिन पाकिस्तान के रूढ़िवादी समाज से फ़ैशन की दुनिया तक का इन महिलाओं का सफ़र मुश्किलों भरा रहा.
फैशन फोटोग्राफर फैसल फ़ारूक़ी कहते हैं, "मेरी बहन को कभी भी मॉडल बनने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. अगर मैंने ये विषय भी अपने घर में छेड़ दिया तो मेरी माँ मुझसे शायद कई दिनों तक बात तक नहीं करेंगी."
खुद पेशे से फैशन फोटोग्राफर फैसल का मानना है कि ज़्यादातर पाकिस्तानी पुरानी धारणाओं को मानने वाले हैं.
हालाँकि उन्होंने महिलाओं के पढ़ने और काम करने के अधिकारों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन आज भी महिलाओं के मॉडलिंग और डान्स जैसे पेशे में उतरने के सख़्त ख़िलाफ हैं.
उनके अनुसार लड़कियाँ पढ़-लिखकर शिक्षिका तो बन सकती हैं, लेकिन उनका मॉडल बनना उन्हें कतई मंज़ूर नहीं.
अंग प्रदर्शन
एक युवा पाकिस्तानी मॉडल, अमीना शफ़त भी फैसल की बात से सहमत हैं.
उनका कहना है, "हमारा समाज दक़ियानूसी है. हमारे मज़हब ने कुछ ऐसी बंदिशें लगाई हुई हैं जिन्हें ज़्यादातर लोग मानते हैं".
अमीना कहती हैं, "मॉडलिंग को आज भी चरित्रहीन महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है. चाहे आप कितनी भी सावधानी बरतें आपको भी उसी श्रेणी में डाल दिया जाता है."
अमीना ने अपने लिए कुछ सीमाएँ तय कर रखीं हैं.
वह शायद अकेली ऐसी पाकिस्तानी मॉडल हैं जो कैटवॉक के ऑफ़र ठुकरा देती हैं और बिना बाजू के कपड़े नहीं पहनतीं.
वे कहती हैं "मैंने ये सीमाएँ अपने परिवार की इच्छा के अनुरूप तय की हैं. मुझे पता है कि वे मुझे मैगज़ीन के कवर पर आधा नंगा देखना पसंद नहीं करेंगे."
परेशानी
पिछले चार साल से फैशन मॉडल, नादिया मलिक का कहना है, "ज़्यादातर यह माना जाता है कि अगर आप मॉडल हैं तो या तो आपको पैसे की ज़रूरत है या आप किसी ख़राब ख़ानदान से ताल्लुक़ रखते हैं. मेरे मामले में ये दोनों ही बातें सही नहीं हैं."
नादिया ने ये पेशा इसलिए चुना क्योंकि उन्हें इस काम में मज़ा आता था. उनके परिवार, ख़ासतौर पर उनकी माँ ने इसमें उनका पूरा साथ दिया.
लेकिन परिवार और दोस्तों के सहयोग के बावजूद उन्हें मॉडल बनने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा जब उनके पास बेहूदा मैसेज और फोन कॉल आने शुरू हुए.
मॉडल और अभिनेत्री, मेहरीन राहेल की कहानी भी नादिया से मिलती-जुलती है.
वह कहती हैं, " हम एक रूढ़िवादी समाज में रहते हैं, जहाँ पुरूषों के लिए आज़ाद, आत्मविश्वासी महिला को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है - फिर चाहे वो ऑफ़िस में हो या रैम्प पर."
बेहतर हालात
एक सफल फ़ैशन कोरियोग्राफ़र, फ़रीहा अलताफ़ 1980 के दशक में मशहूर मॉडल थीं.
वह कहती हैं, "उस समय बहुत कम मॉडल हुआ करती थीं. अच्छे घरों की लड़कियाँ तो इसमें आने का सोच भी नहीं सकती थीं. ऐसे समय में मैंने इस पेशे में आने का साहसिक क़दम उठाया था. लेकिन अनचाहे लोगों से सावधान रहने के लिए मुझे सख़्त रवैया अपनाना पड़ा. "
"लेकिन परेशानी चलती ही रही. पहले मेरे बॉयफ्रेंड और फिर मेरे ससुरालवालों ने समस्या खड़ी की. आख़िर में मुझे सबको खुश करने के लिए और खुद की शांति के लिए मॉडलिंग छोड़नी ही पड़ी."
फैशन संपादक यासिर सईद का मानना है कि इस भेदभाव का संबंध विभिन्न वर्गों से है.
उनका कहना है, "मुझे नहीं लगता कि उच्च वर्ग के लोगों को मॉडलिंग के पेशे से कोई परेशानी है. उनको तो घर में कोई मॉडल होने पर गर्व महसूस होता है. लेकिन मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों की विचारधारा अभी भी पुरानी है और मुझे नहीं लगता कि वह जल्दी बदलेगी."
भविष्य
ये कहना ग़लत नहीं होगा कि पाकिस्तान में लड़कियों के लिए एक करियर के रूप में मॉडलिंग को स्वीकृति मिलने में अभी कई साल लगेंगे.
हालाँकि कई लोगों का मानना है कि शायद ये मंज़ूरी कभी मिले ही नहीं.
जैसे कभी खुद फ़ैशन मॉडल रहे शीराज़ कहते हैं, "मेरी बहनों को मॉडलिंग के पेशे में कभी नहीं उतरने दिया जाएगा और मैं अपनी बीवी को इसमें कभी आने नहीं दूंगा. ये पेशा संभ्रांत घरों की लड़कियों के लिए नहीं हैं क्योंकि इसमें अच्छे लोग नहीं होते. "
वे कहते हैं,"जिन मॉडलों को मैं जानता हूँ, उनमें से ज़्यादातर शराब और सिगरेट पीती हैं. मैं नहीं चाहूँगा कि मेरे घर की लड़कियाँ इनके साथ संपर्क रखें."