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नई भूमिका में एआर रहमान

बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार एआर रहमान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई भूमिका में दिखेंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने रहमान को दुनिया में टीबी यानी तपेदिक के ख़ात्मे के लिए जारी कार्यक्रम 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' के लिए अपना विशेष दूत नियुक्त किया है.

संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में रहमान ने इसी सिलसिले में महासचिव कोफ़ी अन्नान से मुलाक़ात की.

प्रकोप

दुनिया की कुल आबादी का एक तिहाई हिस्सा टीबी के प्रकोप से ग्रसित है. 1993 में डब्लूएचओ ने टीबी को दुनिया की सबसे ख़तरनाक बीमारी कहा था.

भारत में भी टीबी का प्रकोप जारी है

अब दुनिया की जनसंख्या में हो रही बेतहाशा बृद्धि के चलते टीबी ने विकराल रूप धर लिया है.

जानकारों का कहना है कि अगर टीबी को रोकने के लिए व्यापक कार्यक्रम नहीं चलाया गया तो वर्ष 2020 तक एक अरब लोग टीबी से ग्रसित हो जाएँगे.

यह भी आकलन है कि क़रीब सात करोड़ लोग इस बीमारी के कारण मारे जा सकते हैं.

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा चीन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देश टीबी से जूझ रहे हैं.

एआर रहमान इस बीमारी के ख़ात्मे में मदद करने के लिए उत्साहित हैं.

रहमान कहते हैं, "मैं इसे एक चुनौती के रूप में देखता हूँ. सबसे ज़रूरी चीज़ जो मैं करूँगा वह इस बीमारी के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाना है. मैं देखा है कि कई जगह तो लोग दवाएँ मुफ़्त में मिलने के बावजूद भी नहीं लेते."

रहमान ने बताया कि उन्होंने एक गाना भी टीबी की बीमारी और ग़रीबी दूर करने के लिए बनाया है.

उनका कहना है कि वो टीवी और रेडियो के माध्यम से भी लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाएँगे.

इस मौक़े पर संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव जनरल शशि थरूर ने रहमान का स्वागत करते हुए कहा, "हमें ख़ुशी है कि रहमान जैसा व्यक्तित्व हमारे साथ मिलकर इस प्रकोप का मुक़ाबला करने में मदद करेगा और ख़ासकर ऐसे समय में जब टीबी और मलेरिया जैसी पुरानी बीमारियों से नए सिरे से लड़ने की ज़रूरत है."