हिंदी फ़िल्मों के सुपरस्टार शाहरूख़ ख़ान मानते हैं कि कुछ लोग सांप्रदायिक दुर्भावना फैलाने के लिए धर्म का दुरुपयोग कर रहे हैं.
बीबीसी के एशिया टुडे कार्यक्रम को दिए गए एक इंटरव्यू में शाहरूख़ ख़ान ने भारत के शिक्षित मध्यवर्ग से इस समस्या के ख़िलाफ़ आगे आने का आहवान किया.
शाहरूख़ ख़ान ने कहा, "भारत और तेज़ रफ़्तार से प्रगति करे इसके लिए यह ज़रूरी है कि किसी भी तरह की सांप्रदायिक दुर्भावना पर नियंत्रण रखा जाए, जो मेरी समझ से कुछ लोगों के हाथों में है और वो अपने फ़ायदे के लिए इसका अनुचित इस्तेमाल कर रहे हैं."
उन्होंने शिक्षित मध्यवर्ग से आह्वान किया, "इस वर्ग को ये महसूस करना होगा कि दुनिया में भारत को महाशक्ति बनने से जो एक चीज़ रोक सकती है वह यही सांप्रदायिकता है."
धर्मनिरपेक्षता की मिसाल
शाहरूख़ कहते हैं, "मैं धर्मनिर्पेक्षता की एक 'चलती-फिरती मिसाल' हूँ."
मगर शाहरूख़ ने कहा कि उन्हें ये पूरा विश्वास है कि भारतीय लोग मूलतः बेहद धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के हैं.
उन्होंने अपनी मिसाल देते हुए कहा, "आप देखिए कि एक मुसलमान 13 वर्षों से भारतीय फ़िल्मों के शिखर पर है. सबने मुझे स्वीकार किया और किसी ने भी कोई उंगली नहीं उठाई".
38 वर्षीय शाहरूख़ की पत्नी गौरी हिंदू हैं.
रास नहीं राजनीति
शाहरूख़ ने राजनीति में आने की किसी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि वे ये मानते हैं कि हर व्यक्ति एक ख़ास काम के लिए बना होता है.
उन्होंने कहा, "मैं फ़िल्मों के लिए बना हूँ. मैं एक्टिंग करता हूँ, फ़िल्में बनाता हूँ. मैं यही करूँगा और मैं जितना कुछ कर सकता हूँ उसका अब तक बस 10 फ़ीसदी काम ही कर पाया हूँ."
शाहरूख़ बोले, "मेरा काम ये है कि मैं ये पक्का करूँ कि मैं अपने काम से अनेक लोगों का आभार प्रकट कर सकूँ, एक अंधेरे हॉल में ढाई घंटे तक जुटे लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर सकूँ."