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हुसैन के कैनवास से एक और फ़िल्म

मशहूर पेंटर मक़बूल फ़िदा हुसैन की बहुचर्चित फिल्म 'गजगामिनी' भले ही बॉक्स ऑफिस पर कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई हो लेकिन इस नाकामी से उनका विश्वास क़तई नहीं डिगा.

अपनी नई फिल्म 'मीनाक्षी-ए टेल ऑफ थ्री सिटीज़' लेकर वो एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर अपनी क़िस्मत आज़माने की तैयारी में हैं.

फ़िल्म मीनाक्षी... एक ऐसे लेखक की कहानी है जो एक नई किताब लिखने के लिए कथानक की तलाश में है.

लेकिन किसी नए चरित्र के लिए उसे प्रेरणा नहीं मिल पा रही है. तब वह मीनाक्षी नाम की एक दिलचस्प महिला से मिलता है और उससे प्रभावित होकर उसे अपनी कहानी का मुख्य किरदार बनाता है.

फ़िल्म की शूटिंग हैदराबाद, जैसलमेर और प्राग में हुई है.

मक़बूल फ़िदा हुसैन बताते हैं, "इसमें एक चरित्र है मीनाक्षी, और यह चरित्र ऐसा है जो असल ज़िंदगी में भी नज़र आता है."

"फिल्म में लेखक और चरित्र के बीच के अजीब रिश्ते को चित्रित किया गया है. यह सवाल भी उठाया गया है कि इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए."

कई आयाम

फिल्म में मीनाक्षी की भूमिका कई आयाम लिए हुए है. यह भूमिका अलग-अलग शहरों में अलग-अलग रूप लेती है. हैदराबाद में वो इत्र का व्यापार करने वाली महिला है तो जैसलमेर में रेगिस्तान की रौनक या फिर प्राग की अनाथ मारिया.

मक़बूल फ़िदा हुसैन और उनके बेटे उवैस हुसैन
चित्रकारी के साथ फ़िल्मों में भी दिलचस्पी

फिल्म की पटकथा लिखी है ख़ुद एमएफ हुसैन के बेटे उवैस हुसैन ने. उनका कहना था, "मैं हमेशा एक वीडियो कैमरा लेकर घूमता हूँ. छोटी-छोटी फिल्में बनाता हूँ. उसके कुछ तत्व अपनी पेंटिंग में इस्तेमाल करता हूँ."

"ये संवाद लगातार चलता रहता है. मैं तो बस एक मौक़ा तलाश कर रहा था कि कब एक फिल्म बनाऊँ. पर ये मीडियम बहुत ख़र्चीला है इसलिए इतना वक़्त लग गया."

उवैस हुसैन का मानना है कि मीनाक्षी... दूसरी फिल्मों से हटकर है.

"ऐसी है कि न तो समानांतर सिनेमा का रूप है जिसमें बीवी-बच्चे बैठकर रोएं, न कोई छलाँग मारकर हँसाएगा, न बेहद लुभावने तरीके से गाने फिल्माए गए हैं. इसकी कहानी एकदम अलग है."

मक़बूल फ़िदा हुसैन

उनके पिता एमएफ़ हुसैन का दावा है कि फिल्म मीनाक्षी... दर्शकों को ज़रूर पसंद आएगी.

हुसैन कहते हैं, "सबसे पहले दर्शक जिस वजह से खिंचकर आएंगे वो है रहमान का संगीत, फिर संतोष सिवान हैं - जो एक बेहतरीन कैमरामैन हैं. मेरी 50-60 साल की मौजूदगी है और फिर उवैस हैं जो युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं."

"ये पूरा मेल ज़रूर काम करेगा...एक ज़बरदस्त प्रयोग है. युवाओं के लिए जो होना चाहिए, वो सब है इसमें."

इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हैं मशहूर अभिनेत्री तब्बू. लेखक का चरित्र निभाया है चरित्र अभिनेता रघुबीर यादव ने.