होली और बॉलीवुड का जैसे चोली-दामन का साथ रहा है.
'होली' और 'होली आई रे' नाम से फ़िल्में भी बन चुकी है. फ़िल्म 'फ़ागुन' नाम से भी बनी है.
राज कपूर द्वारा आरके स्टूडियोज़ में आयोजित होली तो एक तरह से बॉलीवुड का मिलन समारोह हुआ करता था. दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक सभी उसमें खुल कर भाग लिया करते थे.
लेकिन बॉलीवुड ने होली को सबसे ज़्यादा गानों में भुनाया है.
वी शांताराम की 'नवरंग' से लेकर हाल में आई 'बाग़बाँ' तक होली गीतों वाली फ़िल्मों की एक लंबी सूची बन सकती है.
सुपर स्टार अमिताभ बच्चन का रुपहले पर्दे की होली से कुछ ज़्यादा ही लगाव रहा है.
ब्लॉकबस्टर 'शोले' में जब वीरू और बसंती 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं...' गीत पर नाच रहे होते हैं, अमिताभ बच्चन (जय) पहले तो दूर खड़े देखते हैं लेकिन फिर उनके पैर भी ढोल ताशों की थाप पर थिरकने से नहीं रुक पाते.
लेकिन 'सिलसिला' में भाँग चढ़ाने के बाद तरंग में आए अमिताभ ने 'रंग बरसे भीगे चुनर वाली...' ऐसा मस्त होकर गाया कि यह गीत होली का ही पर्याय बन चुका है.
नई फ़िल्म 'बाग़बाँ' में भी अमिताभ ने एक परंपरागत होली गीत को अपना मर्दाना स्वर दिया है.
हिंदी फ़िल्मों के दर्जनों होली गीतों में से प्रमुख हैं-
तन रंग लो जी मन रंग लो...(कोहिनूर)
होली आई रे कन्हाई...(मदर इंडिया)
अरे जा रे हट नटखट...(नवरंग)
होली के रंग दिल खिल जाते हैं...(शोले)
रंग बरसे भींगे चुनर वाली...(सिलसिला)
अंग से अंग लगा ले सजन...(डर)
आज न छोडेंगे हम हमजोली...(कटी पतंग)
मल दे गुलाल मोहे...(कामचोर)
आई रे आई रे, होली आई रे...(ज़ख़्मी)
ओ देखो होली आई रे...(मशाल)
होरी खेले रघुवीरा अवध में...(बाग़वान)