जापान में क्रिसमस के आसपास लोग इतने रोमांटिक क्यों हो जाते हैं, यह कोई नहीं समझ पाया.
अगर आप इस का सुबूत चाहते हैं तो जगह-जगह खुले उन 'लव होटलों' यानी प्रेम ठिकानों का जायज़ा लीजिए जहाँ क्रिसमस के दौरान इतने जोड़े नज़र आते हैं कि जिसकी कोई हद नहीं है.
अन्य कई ग़ैर-ईसाई देशों की तरह जापान में भी क्रिसमस मनाने का रिवाज शुरू हो गया है.
क्रिसमस के दौरान ईसाई जबकि चर्च में नज़र आते हैं, एक परंपरा सी क़ायम हो गई है कि युवा जोड़ियाँ यह दिन होटल के कमरों में बंद हो कर मनाती हैं.
इसी दिन विवाह के इच्छुक अपने साथी से शादी का प्रस्ताव रखते हैं और जो बरसों से शादी-शुदा हैं वे भी परिवार की भीड़भाड़ से दूर होटल का एकांत ढूँढते हैं.
अन्य देशों की तरह जापान के होटल भी महंगे हैं. और ऐसे में काम आते हैं यह प्रेम ठिकाने.
कुछ घंटे भी...
एक ख़ास बात यह कि ये ठिकाने घंटे के हिसाब से कमरा देते हैं.
प्रेम दो घंटे का हो या चार घंटे का. या फिर सारी रात का. उसी हिसाब से कमरा लीजिए और किराया दीजिए.
यहाँ आपको कमरा लेते समय बुकिंग क्लर्क की कुछ भांपती, पैनी नज़र की शर्मिंदगी भी नहीं उठानी पड़ेगी.
जो कमरा चाहिए उसका नंबर दबाइए, चाबी हाज़िर. और जाते समय इसी तरह भुगतान कीजिए.
एक नज़र कमरों पर. कहीं-कहीं पलंग पचास के दशक की कैडिलैक कार के आकार का. तो कहीं छतों और दीवारों से ऐसी रोशनी छन कर आती हुई जैसे आप समुद्र की तह में हैं.
ऐसे प्रेम ठिकाने जापान भर में जगह-जगह मौजूद हैं.
बस नुक़सान यह है कि आप ऐडवांस बुकिंग नहीं करा सकते.
अब प्रेम करने के लिए जाड़े की ठंडी रात में सड़क पर लंबी क़तार में घंटों खड़ा होना कोई नुक़सान का सौदा तो नहीं है न!