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एड्स का एहसास दिलाने के लिए फ़िल्म

एशिया में एड्स के बढ़ते ख़तरे से चिंतित ब्रिटेन की एक स्वास्थ्यकर्मी ने इस बारे में जागरूकता लाने के लिए एक ऐसा तरीक़ा सोचा जो लोगों को सचमुच प्रभावित कर सके.

उन्होंने इस विषय पर एक फ़ीचर फ़िल्म ही बना डाली.

करमजीत बल्लागन की फ़िल्म 'एक पल' भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गाँवों में दिखाए जाने की योजना है.

फ़िल्म पूरी तरह बॉलीवुड की शैली में बनी है. यानी गाने, प्रेम, रोना-धोना-सभी कुछ.

करमजीत का कहना है कि उन्होंने देखा कि बर्मिंघम में एशियाई समुदाय के लोग एचआईवी और एड्स के ख़तरे से काफ़ी हद तक अनजान हैं.

पूरी उपेक्षा

सम्मेलनों, बैठकों और पर्चे बाँटने से स्थानीय समुदाय, ख़ास तौर पर महिलाओं को कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ रहा था.

तो करमजीत ने सोचा कि एक ही तरीक़ा है जिससे लोगों की आँखें खुल सकती हैं और वह है बॉलीवुड स्टाइल की कोई फ़िल्म.

करमजीत कहती हैं, "एशियाई इस बात को मानने को तैयार ही नहीं थे कि एचआईवी उन्हें भी प्रभावित कर सकता है. मुझे चिंता थी कि उनका भी अफ़्रीका जैसा हश्र न हो".

"भारत में आँकड़े तेज़ी से बढ़ रहे हैं और जल्दी ही कोई कार्रवाई ज़रूरी है".

करमजीत का कहना है, "लोग बैठकों में जाने से शर्मिंदगी महसूस करते हैं और उनके आध्यात्मिक नेता उनसे कहते हैं कि उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है. यह समस्या उनके आड़े नहीं आएगी".

करमजीत और उनकी टीम ने सोचा कि फ़िल्म की ओर लोगों का ध्यान ज़रूर जाएगा और यह एक कारगर माध्यम साबित हो सकता है.

फ़िल्म में भारतीय टेलीविज़न के कई प्रमुख अभिनेता और अभिनेत्रियों ने काम किया है और उनमें से अधिकतर ने इसके लिए कोई पैसे नहीं लिए.

मशहूर गायक कुमार शानू ने इसका साउंड ट्रैक रिकॉर्ड किया है.

करमजीत कहती हैं कि यह फ़िल्म जब बर्मिंघम में दिखाई गई तो लोगों ने इसे बड़े ध्यान से देखा और वे प्रभावित भी नज़र आए.