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एक और पुस्तक विवादों के घेरे में

तस्लीमा नसरीन के बाद अब बांग्लादेशी चरित्रों को लेकर किताब लिखने वाली एक और लेखिका विवादों के घेरे में हैं.

ब्रिटेन में रहने वाले बांग्लादेशी समुदाय के नेताओं ने मौनिका अली के चर्चित पहले उपन्यास 'ब्रिक लेन' को अपमानजनक बताया है.

बांग्लादेशियों की प्रमुख संस्था ग्रेटर सिलहट विकास और कल्याण संस्था ने किताब के प्रकाशकों रैंडम हाउस को पत्र लिख कर कहा है कि यह उपन्यास 'शर्मनाक' है.

उपन्यास में एक ऐसी बांग्लादेशी महिला की कहानी है जो लंदन आ कर बस जाती है.

संस्था ने शिकायत की है कि किताब में बांग्लादेशियों को आर्थिक कारणों से आए आप्रवासी बताया गया है और उन्हें 'नासमझ' कहा गया है.

बुकर के लिए मनोनीत

उन्होंने 18 पन्नों के एक पत्र में अपनी आपत्तियों का ज़िक्र किया है और उसकी एक प्रति इस वर्ष के बुकर पुरस्कार के मुख्य चयनकर्ता जॉन कैरी को भी भेजी है.

यह पुस्तक इस साल बुकर पुरस्कार के लिए मनोनीत हुई है.

इस पुस्तक को गार्डियन ने किसी भी लेखक की पहली किताब की श्रेणी में पुरस्कार के लिए मनोनीत किया है.

शिकायत में इसके एक उस अंश का ज़िक्र किया गया है जहाँ एक चरित्र चानू, ब्रिक लेन में रहने वाले बांग्लादेशियों की निंदा करता है.

वह उन्हें 'अशिक्षित', 'निरक्षर', 'बंद दिमाग़ वाला' और 'महत्वाकांक्षाओं से परे' बताता है.

प्रकाशन गृह की एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि कंपनी को नहीं लगता कि उपन्यास में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है.

उन्होंने कहा कि यह किताब एक काल्पनिक उपन्यास है.

उनका कहना था, "मॉनिका अली का उपन्यास छाप कर हम गर्व का अनुभव कर रहे हैं. इसके बारे में आपत्तियाँ और इसे सेंसर करने की मांग दोनों वाहियात हैं".

यह किताब जून में प्रकाशित हुई थी और इसकी समीक्षाओं में इसे एक बेहतरीन कृति बताया गया है और इसकी भारी बिक्री हुई है.