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बॉलीवुड फ़िल्मों पर प्रतिबंध को चुनौती

पूर्वोत्तर भारत के सिनेमा घरों के मालिकों और वितरकों का कहना है कि बॉलीवुड की फ़िल्मों के प्रदर्शन पर अलगाववादियों की रोक को चुनौती देने के अपने इरादे पर वे क़ायम हैं.

दो प्रमुख अलगाववादी गुटों ने सात पूर्वोत्तर राज्यों में हिंदी फ़िल्मों के प्रदर्शन पर यह कह कह आपत्ति ज़ाहिर की है कि वे स्थानीय संस्कृति के ख़िलाफ़ हैं.

ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स ऐसोसियेशन का कहना है कि यह प्रतिबंध स्थानीय फ़िल्मोद्योग को नुक़सान पहुँचाएगा.

कई थियेटर मालिकों का कहना है कि यदि उन्होंने हिंदी फ़िल्में नहीं दिखाईं तो वे तबाही के कगार पर पहुँच जाएँगे.

युनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम यानी उल्फ़ा और नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड का कहना है कि बॉलीवुड फ़िल्मों के उत्तेजक नाच-गाने के दृश्य युवाओं पर ग़लत असर डालते हैं.

अपील

सिनेमाघरों के मालिकों और वितरकों की संस्था ने अलगाववादियों से अपील की है कि एक ऐसे इलाक़े में जहाँ बेरोज़गारी पहले ही बहुत ज़्यादा है,वे अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करें.

ऐसोसियेशन के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की पाबंदी फ़िल्मों के ग़ैर-क़ानूनी तौर पर प्रदर्शन को बढ़ावा देगी जिससे राजस्व का भारी नुक़सान हो सकता है.

पूर्वोत्तर राज्य असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बीबीसी से कहा कि वह प्रतिबंध को चुनौती देने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्रोहियों का क़दम अलोकतांत्रिक है और वह सिनेमाघरों के मालिकों को इस प्रतिबंध को चुनौती देने में पूरी सहायता देंगे.