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अनिल कपूर बनेंगे 'मृतक'

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के लालबिहारी मृतक ने बरसों अदालतों, सरकारी दफ़्तरों और मानवाधिकार आयोग के चक्कर लगाए

वह चिल्ला-चिल्ला कर यही कहते रहे कि भाइयो, मैं मरा नहीं हूँ! जिंदा हूँ! लेकिन उनकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं था.

अब उनकी आवाज़ को स्वर देंगे अभिनेता अनिल कपूर रुपहले परदे पर.

क्यों चक्कर में पड़ गए? आइए हम बताते हैं क़िस्सा क्या है.

लालबिहारी रोज़ी-रोटी की तलाश में खाड़ी के देशों में क़िस्मत आज़माने गए.

जब लौटे तो पता चला कि भाई-बंधुओं ने पटवारी से मिल कर सरकारी काग़ज़ों में उनको मरा हुआ दिखा दिया है और सारी ज़मीन-जायदाद पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

लालबिहारी को पता चला कि उन जैसे और भी बहुत से लोग हैं.

बस, उन्होंने सबको एक जुट किया और मृतक संघ की स्थापना कर डाली.

इस संघ के सभी सदस्य अपने नाम के बाद मृतक की उपाधि लगाते हैं.

इस संघ के सदस्य अदालत गए. मानवाधिकार आयोग ने उनकी बात सहानुभूति-पूर्व सुनी और उन्हें इंसाफ़ दिलाने का आश्वासन दिया.

चुनाव में उम्मीदवार

लालबिहारी मृतक ने 2002 में आज़मगढ़ से विधानसभा चुनाव भी लड़ा.

उन्हें पहली बार 1976 में पता चला कि वह सरकार की नज़र में मरे हुए हैं.

उसके बाद चला लंबा संघर्ष जिसमें वह कई लोगों को इंसाफ़ दिलाने में कामयाब हुए.

उन्हें भी अपनी पहचान और अपनी खोई हुई ज़मीन वापस मिली. लेकिन उनका कहना है कि जब तक उनके संघ के सभी सदस्यों को न्याय नहीं मिलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी.

अभी पिछले महीने अमरीका की एक संस्था ने उन्हें इग्नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की.

कुछ समय पहले बीबीसी हिंदी ने अपनी श्रृंखला इंसाफ़ मे जब लालबिहारी मृतक की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी प्रसारित की तो बड़ी संख्या में श्रोता इस अनोखी दास्तान से हैरान रह गए.

अब मशहूर फ़िल्मकार सतीश कौशिक ने लाल बिहारी मृतक की ज़िंदगी पर एक फ़िल्म का ऐलान किया है जिसमें मुख्य भूमिका निभाएँगे अनिल कपूर.