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यौन संबंधों के पहलुओं पर फ़िल्म समारोह

सेक्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पहला अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह मुंबई में रविवार को संपन्न हुआ.

इसे 'फ़र्स्ट इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑन सेक्सुएलिटी ऐंड जेंडर प्लूरैलिटी' कहा जा रहा है और इसे ल'रज़िश' नाम दिया गया था.

लरज़िश का मतलब 'होठों की कपकपाहट से लेकर क्रांति की थर्राहट' तक माना जा सकता है.

इस अनोखे फ़िल्म समारोह में 40 फ़िल्में दिखाई गईं जो फ़िक्शन, डॉक्यूमेंटरी या एनिमेशन वाली थीं.

ये फ़िल्में विभिन्न विषयों को छूने वाली थीं जिनमें युवाओं, महिलाओं, यौनकर्मियों और ख़ासतौर से समलैंगिकों के संबंधों पर विशेष ध्यान रहा.

इन फ़िल्मों के प्रदर्शन के बाद उनपर बहस भी हुई.

समारोह में अमरीका, ब्रिटेन, फ़िनलैंड, हॉलैंड, कनाडा और इटली जैसे देशों की फ़िल्मों के साथ ही भारत की फ़िल्मों का प्रतिनिधित्व भी हुआ.

दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ ही दक्षिण - पूर्वी देशों की फ़िल्में भी समारोह में हिस्सा लिया.

विभिन्न विषय

समारोह कई विषयों पर ज़ोर रहा.

अमरीका की 'द शेप ऑफ़ द गेज़' सात मिनट की मूक फ़िल्म थी. इसकी रोचकता को लेकर लोगों में काफ़ी उत्सुकता देखी गई.

इसी तरह जर्मनी से आई पुरस्कृत फ़िल्म 'ले पेटिट मॉर्ट' आठ मिनट की फ़िल्म थी जिसमें एक महिला को आत्महत्या करने की भरसक कोशिश करते दिखाया गया है.

फ़िनलैंड से आई फ़िल्म 'प्योर' में दिखाया गया कि कैसे समाज में महिलाओं पर अत्याचार एक आम घटना होते जा रहे हैं.

इस कार्यक्रम का आयोजन मुंबई के एक समूह 'हमजिंसी' ने किया जो समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करता है.