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नसीर की एक शाम, दुबई के नाम

दुबई में रहने वाले भारतीयों को कला और संस्कृति के नाम पर अक्सर पॉप गायकों, थिरकते मॉडल और फ़िल्म सितारों से ही दिल बहलाना पड़ता है.

इसलिए जब नसीरुद्दीन शाह अपनी पत्नी रत्ना और बेटी हीबा के साथ इस्मत चुगताई की तीन मशहूर कहानियों के मंचन के लिए यहाँ आए तो लोगों की ख़ुशी और उत्सुकता स्वाभाविक थी.

उत्सुकता इस बात को लेकर थी कि मंच पर सिर्फ़ कहानियाँ सुनाते हुए इतना बड़ा कलाकार कैसा लगेगा.

क्राउन प्लाज़ा में 'इस्मत आपा के नाम' नामक इस प्रस्तुति में उपस्थित दर्शकों को इसका बख़ूबी अंदाज़ा मिल गया.

ऐसा लगा मानो इस्मत चुगताई अपने ज़माने की दक़ियानूसी सोच के ऊपर प्रहार करती ख़ुद आ बैठी हों.

चुगताई की कहानियों 'छुईमुई', 'मुग़ल बच्चे' और 'घरवाली' की पंक्तियाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संस्कृति की व्याख्या करती हैं.

पौने दो घंटे की यह अनोखी प्रस्तुति न सिर्फ़ कहानी सुनाने का अनोखा ढंग है, बल्कि इस्मत की दुनिया को समझाने का एक ख़ूबसूरत तरीक़ा भी.

अदाकारी

नसीर, रत्ना और हीबा ने एक-एक कहानी सुनाई- थोड़ी बैठ कर, थोड़ी टहल कर और कुछ एक्टिंग कर के.

ऐसा प्रतीत होता था जैसे कहानी के सारे किरदार एक-एक कर के दर्शकों के सामने आते और अपने दिल की बात बताकर चले जाते.

पहली कहानी 'छुईमुई' हीबा ने प्रस्तुत की, और दूसरी 'मुग़ल बच्चा' रत्ना ने.

'घरवाली' सुनाने की बारी नसीर की थी.

कहानी के पात्र लाजो और मिर्ज़ा की अदाओं को उन्होंने जिस तीव्रता और ऊर्जा के साथ जिया वो देखते ही बनता था.