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मौज-मस्ती और गीत-संगीत की धूम

जोश, मस्ती, धूम और धमाल का दूसरा नाम बना यहाँ लंदन में लगा मेला-2003.

ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई लोगों की संस्कृति और उनके जीने के ढंग को दिखाते इस मेले में जहाँ एक तरफ़ गीत-संगीत की धूम थी तो दूसरी तरफ़ धूम थी फ़ैशन की.

कपड़ों से लेकर तरह-तरह के खाने-पीने की चीज़ें, फिर वो चाहे लाहौरी दही-भल्ले हो, चटपटे समोसे हों, रोग़नजोश हो या मशहूर शेफ़ संजीव कपूर के हाथों से बने तरह-तरह के व्यंजन.

यानी बस देखते ही मुँह में पानी आ जाए.

मगर जैसे लोगों के लिए इतना सब कुछ भी काफ़ी नहीं था तो इस मेले में चार चाँद लगाने पहुँचीं, अभी कुछ ही दिन पहले पिया के घर को विदा हुईं करिश्मा कपूर.

लोगों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया.

गीत-संगीत की बहार

जब मेले के स्टेज पर उषा उत्थुप ने हिंदी गाने गाए तो वहाँ खड़े लोग ख़ुद को थिरकने से रोक नहीं सके.

मेले में फ़ैशन से जुड़ी चीजों ने लोगों को अपनी और काफ़ी आकर्षित किया, जहाँ तरह-तरह के एशियाई आभूषणों से लेकर कपड़ों तक मौजूद थे.

गीत संगीत में अपाचे इंडियन से लेकर रिशी रिच ने तो जैसे लोगों को अपने जादू से बाँध ही दिया.

खाने-पीने वाले हिस्से का लोगों ने पूरा मज़ा लिया. वैसे यहाँ लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताने के लिए हेल्थ ज़ोन भी था.

बच्चों के लिए खेल-कूद के सामान थे तो युवाओं के लिए करियर से जुड़ी समस्याएँ सुलझाने की व्यवस्था की गई थी.यानी सब के लिए कुछ न कुछ.

तो जब इतनी मस्ती हो गीत-संगीत हो तो लोग भला मतवाले क्यों न हो जाएँ.

लगातार दूसरे साल लगा ये मेला लोगों को साल भर याद करने के लिए कुछ मीठी-मीठी यादें दे गया है.

फिर जब अपने घर से हज़ारों किलोमीटर दूर यहाँ लंदन में मेले का मज़ा मिल जाए तो भला उसे कौन छोड़ना चाहेगा.