भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात में पिछले साल हुए सांप्रदायिक दंगों के मुक़दमों की सुनवाई के लिए नए वकील नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं.
न्यायालय ने यह भी कहा है कि इन वकीलों के नामों को देश के अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी से मंज़ूरी लेनी होगी जो केंद्र सरकार के सबसे बड़े क़ानूनी अधिकारी हैं.
जानकारों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय गुजरात में सांप्रदायिक दंगों के प्रभावितों को न्याय नहीं दिला पाने संबंधी आलोचनाओं के बाद राज्य सरकार पर कुछ न्यायिक लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है.
न्यायालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और 17 वर्षीय ज़ाहिरा शेख़ की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए हैं.
बेस्ट बेकरी हत्याकांड में ज़ाहिरा शेख़ के पिता भी मारे गए थे.
इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई फिर से शुरु की जाए जिसमें 21 हिंदू अभियुक्तों को जून में बरी कर दिया गया था.
ज़ाहिरा शेख़ का कहना है कि उन्होंने और अन्य गवाहों ने अपने बयान इसलिए बदल दिए थे क्योंकि कुछ हिंदू नेताओं ने जाने गंभीर नतीजे भुगतने की धमकियाँ दी थीं.
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व महाधिवक्ता हरीश साल्वे को गुजरात दंगों में न्यायालय की सहायता करने के लिए भी नियुक्त किया है.
हरीश साल्वे गुजरात के सांप्रदायिक दंगों की सुनवाई में अभियोग पक्ष की मदद करेंगे. उन्हें जनहित से जुड़े मामलों में काफ़ी सख़्त माना जाता है.
साथ ही गुजरात सरकार ने गुरुवार को हलफ़नामा दायर करके कहा है कि बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में शुक्रवार को फिर से शुरु होगी.
गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में मारे गए काँग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ने भी सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की माँग की है.
आग्रह
उन्होंने इस मामले में मामले की सुनवाई गुजरात से बाहर करवाने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, "हमें गुजरात में किसी पर भरोसा नहीं है. जिन्होंने हमारे लोगों की हत्या की, वे खुलेआम घूम रहे हैं. हमें इंसाफ़ चाहिए जो गुजरात में मुश्किल है."
उनके साथ कोर्ट में आए सईद पठान इस मुक़दमें में चश्मदीद गवाह हैं.
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी हमें डराया धमकाया जा रहा है. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेता हमें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं."
बेस्ट बेकरी कांड के 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए गुजरात सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी.
जिसके बाद गुजरात सरकार ने इस कांड के अभियुक्तों को बरी किए जाने के निचली अदालत के फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी.
पिछले साल गुजरात दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी कांड सबसे भयावह था, जिसमें 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया था.