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आज़म तारिक़ के जनाज़े में हिंसा भड़की

पाकिस्तान के सांसद और प्रतिबंधित संगठन सिपाहे सहाबा के प्रमुख मौलाना आज़म तारिक़ की शव यात्रा के दौरान के जमा हुई भीड़ हिंसक हो उठी जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई.

सोमवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने इस्लामाबाद के निकट सांसद आज़म तारिक़ सहित पाँच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

सिपाहे सहाबा सुन्नी चरमपंथी संगठन माना जाता है और पिछले साल इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

मंगलवार को राजधानी इस्लामाबाद में नेशनल एसेंबली के बाहर तीन हज़ार से अधिक लोग इकट्ठा हो गए और उसके बाद उन्होंने एक सिनेमा हॉल में आग लगा दी, दुकानों के शीशे तोड़े और शिया विरोधी नारे लगाए.

पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज करना पड़ा.

उधर सरकार ने आज़म की हत्या की जाँच के आदेश दे दिए हैं.

हालाँकि इस हत्याकांड की ज़िम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है लेकिन पुलिस का कहना है कि ये हमला भी जातीय हिंसा से जुड़ा लगता है.

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि सिपाहे सहाबा तालेबान से सहानुभूति रखता था और इसके समर्थकों को सैकड़ों शिया लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार माना जाता है.

सुरक्षा कड़ी

इस घटना के बाद शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के प्रमुख नेताओं की निजी सुरक्षा के लिए कड़ी व्यवस्था की गई है.

कराची के कुछ हिस्सों में तनाव देखा गया है और शहर के उत्तरी हिस्से में कुछ दुकानें भी बंद रहीं.

मौलाना तारिक़ के समर्थकों की एक प्रमुख मस्जिद कराची के उत्तरी हिस्से में ही है.

पाकिस्तान में शिया और सुन्नी समुदायों के बीच हिंसा का इतिहास तीस वर्ष पुराना है.

अब तक इस हिंसा ने दोनों तरफ़ के लगभग चार हज़ार लोगों की जान ली है.