मुंबई में एक अदालत ने फ़िल्म फ़ाइनेंसर और हीरा व्यापारी भरत शाह को माफ़िया के बारे में जानकारी छिपाने के लिए एक साल की सज़ा सुनाई है.
फ़िल्म निर्माता नज़ीम रिज़वी और उनके सहायक अब्दुल रहीम अल्लाबख़्श को छह साल के सश्रम कारावास की सज़ा दी गई है.
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि वह अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर करेगी.
महाराष्ट्र सरकार को इस बात पर आपत्ति है कि भरत शाह को महाराष्ट्र में संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए बने क़ानून 'मोका' के तहत दोषी नहीं पाया गया.
राज्य के उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल ने बीबीसी हिंदी डॉटकॉम से कहा कि सरकार ये समझती है कि भरत शाह को मोका के दायरे में दोषी ठहराया जाना चाहिए था.
मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर(क्राइम ब्रांच) सत्यपाल सिंह ने बीबीसी को बताया,"सज़ा दी ज़रूर गई है मगर यह मोका के तहत नहीं हुआ?".
भरत शाह को सामान्य भारतीय दंड संहिता के आधार पर ही सज़ा सुनाई गई.
वैसे भरत शाह को जेल नहीं जाना होगा क्योंकि वे एक वर्ष से अधिक समय पहले ही हिरासत में बिता चुके हैं.
रिज़वी और उनके सहायक को पाँच-पाँच लाख रूपए का जुर्माना भी देना पड़ेगा.
इन दोनों को माफ़िया सरगना छोटा शकील के साथ संबंध होने और संगठित अपराध में शामिल होने का दोषी पाया गया है.
मुंबई में एक विशेष अदालत के न्यायाधीश एपी भंगाले ने मंगलवार को इन तीनों व्यक्तियों को दोषी बताया था और उन्हें बुधवार को सज़ा सुनाई गई.
बॉलीवुड और माफ़िया के बीच संबंध होने का ये मामला फ़िल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' से शुरू हुआ.
इस फ़िल्म के बारे में आरोप लगे थे कि ये फ़िल्म छोटा शकील के पैसे से बनाई गई थी.
भरत शाह इस फ़िल्म के फ़ाइनेंसर थे और नज़ीम रिज़वी इसके निर्माता.
अदालत ने इस मामले में चौथे सह-अभियुक्त, दुबई के एक व्यवसायी मोहम्मद शम्सुद्दीन उर्फ़ भतीजा को सबूत न होने के कारण बरी कर दिया है.
अदालत ने शाह को महाराष्ट्र में संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए बने क़ानून मोका के तहत दोषी नहीं पाया है इसलिए उनके ख़िलाफ़ सामान्य क़ानून लागू किया गया.
रिज़वी और उनके सहायक को सामान्य आपराधिक क़ानून और महाराष्ट्र में संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए बने क़ानून मोका के तहत दोषी पाया गया था.
मामला
भरत शाह को जनवरी 2001 में अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर छोटा शकील को सहयोग और प्रोत्साहन देने के आरोप में गिरफ़्तार किया था.
18 महीने जेल में रहने के बाद वे अभी ज़मानत पर रिहा थे.
रिज़वी को दिसंबर 2000 में गिरफ़्तार किया गया था.
उन पर आरोप लगा था कि उनकी फ़िल्म "चोरी चोरी चुपके चुपके" बनाने के लिए छोटा शकील ने पैसा लगाया था.
बॉलीवुड और माफ़िया के बीच संबंधों से जुड़े इस मुक़दमे में कई फ़िल्मी सितारों को गवाह बनाया गया था.
मगर सलमान ख़ान, शाहरुख़ ख़ान, राकेश रोशन, महेश मांजरेकर, अली मोरानी और संजय गुप्ता सहित 13 गवाह अदालत में अपने पहले के बयान से मुकर गए थे.
प्रीति जिंटा ऐसी पहली बॉलीवुड कलाकार थीं जिन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील के मामले में पुलिस को दिए अपने बयान पर अदालत में भी कायम रहीं.