मौजूदा आर्थिक संकट में बैंकों की भूमिका को लेकर दुनियाभर में सवाल उठ रहे हैं.
इसको देखते हुए ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि वो बैंकों का कामकाज कैसे चल रहा है इसकी स्वतंत्र रूप से जाँच करेगा.
इस जाँच में बैंकों के आला अधिकारियों के वेतन और बोनस की जाँच भी शामिल है.
उल्लेखनीय है कि अनेक बैंकों को सरकार की ओर से करदाताओं का धन आर्थिक सहायता के रूप में मिला है.
ब्रिट्रेन के वित्त एलिस्टर डार्लिंग ने कहा,'' लोग बैंकों के बोनस दिए जाने को लेकर नाराज़ हैं और निदेशकों का ये कर्तव्य है कि वे ज़िम्मेदारी भरा व्यवहार करें.''
ऐसी ख़बरें हैं कि रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड सरकार से भारी आर्थिक सहायता मिलने के कुछ महीने बाद डेढ़ अरब डॉलर के बोनस बाँटने की तैयारी में है.
बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी सरकार से आर्थिक सहायता लेने वाले कंपनियों के अधिकारियों की वेतन सीमा निर्धारित करने की घोषणा की थी.
मंदी की मार
उल्लेखनीय है कि दिसंबर महीने में आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन को मंदीग्रस्त घोषित कर दिया गया था.
1991 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि ब्रिटेन को मंदी का सामना करना पड़ रहा है.
मंदी की एक परिभाषा ये भी है कि लगातार दो तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर ऋणात्मक हो जाए तो उस स्थिति को मंदी मान लिया जाता है.
इधर, पाउंड डॉलर के मुक़ाबले 24 वर्षों के अपने न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा है.
ब्रिटेन में मंदी का दौर गुज़रने में अक्सर साल-सवा साल का समय लगता है इसलिए विश्लेषक कह रहे हैं कि 2010 से सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती.
आशंका व्यक्त की जा रही है कि ब्रितानी अर्थव्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास उठ रहा है इसलिए सरकार अधिक से अधिक रियायतें दे रही है ताकि विदेशी निवेश बना रहे.