गुरुवार, 05 फ़रवरी, 2009 को 14:11 GMT तक के समाचार
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने आर्थिक मंदी की मार से निबटने के लिए ब्रिटेन में ब्याज दर में एक बार फिर कटौती की है.
ब्याज दर को 1.5 प्रतिशत से घटाकर अब एक प्रतिशत कर दिया गया है जो अपने-आप में एक रिकॉर्ड है.
मंदी की मार शुरू होने से पहले पिछले वर्ष अक्तूबर में ब्याज दर 5 प्रतिशत थी.
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने पिछले वर्ष अक्तूबर से लेकर अब तक पाँच बार ब्याज दरों में कटौती की है ताकि मंदी के दौर में लोगों के पास नकदी उपलब्ध हो, वे ख़र्च करते रहें और अर्थव्यवस्था का पहिया घूमता रहे.
दिसंबर महीने में आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन को मंदीग्रस्त घोषित कर दिया गया है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बदले संकुचन दर्ज किया जा रहा है.
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड को उम्मीद है कि ब्याज दर में कटौती से मंदी का असर कम होगा और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी.
चिंताएँ
कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सिर्फ़ ब्याज दर में कटौती से ही मंदी की समस्या नहीं सुलझेगी. उनका कहना है कि इस तरह की कटौतियों से बचत खातों पर बहुत बुरी मार पड़ेगी.
ब्रितानी लघु उद्योग संघ (एफ़एसबी) का कहना है कि ब्याज दर में और कटौती की ज़रूरत नहीं है, असल में लोगों को आसानी से कर्ज़ उपलब्ध कराना एक ज़रूरी काम है.
एफ़एसबी के चेयरमैन जॉन राइट ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि ब्याज दरों में पिछली कटौतियों का वांछित असर नहीं हुआ है इसलिए अब यह ज़रूरी हो गया है दूसरी तरह के आर्थिक प्रोत्साहनों का भी प्रयोग किया जाए."
प्रमुख अर्थशास्त्री जर्मी लीच ने कहा, "ब्याज दरों में कटौती का बिल्कुल सीधा और तत्काल लाभ आम जनता तक पहुँचने में दिक्कतें आती हैं लेकिन ब्याज दर में कटौती का लाभ तो होता ही है."
कई अर्थशास्त्री तो कहने लगे हैं कि ब्रितानी अर्थव्यवस्था की हालत इतनी ख़राब है कि ब्याज दर को शून्य के करीब ले जाना ही सही विकल्प होगा.
यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने ब्याज दर को स्थिर रखने का फ़ैसला किया है, यूरोपीय ब्याज दर इस समय दो प्रतिशत है.