सोमवार, 26 जनवरी, 2009 को 19:41 GMT तक के समाचार
भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार की गति धीमी होने की पुष्टि की है और कहा है कि दुनिया में आई मंदी का मिला जुला असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर आने वाले दिनों में दिखेगा.
बैंक ने वर्ष 2008-09 के लिए अर्थव्यवस्था की समीक्षा में आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी के गिरने की संभावना जताई है.
रिजर्व बैंक ने 7.7 फ़ीसदी जीडीपी दर के लक्ष्य को घटा कर 6.8 फ़ीसदी कर दिया है.
समीक्षा में कहा गया है कि औद्योगिक गतिविधियों ख़ासकर आधारभूत ढांचे और उत्पादन क्षेत्र में रफ्तार बहुत धीमी हो सकती है.
बैंक ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार '' सेवा क्षेत्र की गति सबसे धीमी '' रहेगी. इतना ही नहीं निर्माण, परिवहन, संचार, व्यापार, होटल और रेस्तरां जैसे क्षेत्रों में स्थिति ख़राब हो सकती है.
मांग में कमी होने और बढ़ती दरों के कारण व्यवसायियों का विश्वास डांवाडोल हो रहा है.
निर्माण क्षेत्र की मुख्य ज़रुरतों यानी स्टील और सीमेंट की मांग में लगातार कमी हो रही है जिसका असर हर क्षेत्र पर हो रहा है.
बैंक का कहना है, '' यह ध्यान देने वाली बात है कि विकसित देशों में वित्तीय सेक्टर में मंदी का असर रियल एस्टेट पर पड़ा है जबकि भारत में इसका उलटा हुआ है. ''
बैंक के आकड़ों के अनुसार अर्थव्यवस्था मिली जुली रहेगी क्योंकि किसानों के ऋणों को माफ़ करने, सरकारी नौकरियों में वेतनमान बढ़ने और चुनाव से पहले होने वाले खर्चों के कारण मांग बढ़ सकती है.
बैंक का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का निर्यात न केवल बढ़ा है बल्कि जिन देशों को निर्यात होता है उसमें भी बदलाव आया है. अब चीन, हांगकांग, सिंगापुर, यूएई, जर्मनी और एशिया के कई देशों में निर्यात हो रहा है.
हालांकि बैंक के अनुसार आर्थिक विकास की दर में कमी के ही संकेत दिख रहे हैं लेकिन तेल के दामों में कमी और सरकार के उपायों से स्थिति बेहतर भी हो सकती है.