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शुक्रवार, 23 जनवरी, 2009 को 20:11 GMT तक के समाचार

सत्यम में नया सीईओ अगले हफ़्ते तक

सत्यम कंप्यूटर्स का संचालन कर रहे सरकारी बोर्ड ने कहा है कि इसके खर्चों के लिए धन की व्यवस्था के बारे में अंतिम फ़ैसला बुधवार तक कर लिया जाएगा.

बोर्ड ने कहा है कि अगले हफ़्ते तक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का भी चयन कर लिया जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बोर्ड ने सरकारी वकील के उस दावे पर भी सवाल खड़े किए हैं जिसमें कहा गया था कि सत्यम बोर्ड के कर्मचारियों की संख्या 53 हज़ार न होकर 40 हज़ार है.

बोर्ड ने कहा है, "प्रथमदृष्टया तो कर्मचारियों की संख्या पर शक करने का कोई कारण नज़र नहीं आता."

उल्लेखनीय है कि गत सात जनवरी को सत्यम कंप्यूटर्स के प्रमुख रामालिंगा राजू ने सात हज़ार करोड़ रुपयों से भी अधिक के घोटाले की बात स्वीकार की थी.

इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उनके साथ उनके भाई रामा राजू और मुख्य वित्तीय अधिकारी को भी गिरफ़्तार किया गया है और सत्यम के बोर्ड को भंग कर दिया गया है.

अब कंपनी का कामकाज एक सरकारी बोर्ड संभाल रहा है.

सीईओ-सीएफ़ओ

अनुमान है कि सत्यम कंप्यूटर्स का नया बोर्ड 28 जनवरी तक यह घोषणा कर देगा कि वह धन की व्यवस्था किस तरह से कर रहा है जिससे कि कंपनी का काम मार्च 2009 तक चल सके.

बोर्ड की बैठक के बाद कहा गया है कि कपनी में धन की आवक अच्छी है और नक़दी की स्थिति बेहतर हुई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कंपनी के निदेशकों में से एक दीपक पारेख ने कहा है कि धन की व्यवस्था करने के लिए कंपनी की अचल संपत्ति को रहन रखा जा सकता है.

पारेख ने कहा है कि कंपनी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफ़ओ) के पदों के लिए 40 आवेदन मिले हैं.

उनका कहना था कि इन आवेदनों में से अंतिम तीन आवेदनों का चयन कर लिया गया है और अंतिम फ़ैसला अगले हफ़्ते तक ले लिया जाएगा.

नज़र रखे हुए हैं ग्राहक

हालांकि इस बीच सत्यम कंप्यूटर्स के कुछ ग्राहकों ने कंपनी के साथ अपना कारोबार ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

लेकिन ज़्यादातर ग्राहक कंपनी की स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और अभी उन्होंने कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है.

कुछ ग्राहकों ने तो कंपनी के आर्थिक संकट को देखते हुए अग्रिम भुगतान की भी मंज़ूरी दे दी है.

समाचार एजेंसी ने सत्यम कंप्यूटर्स के यूरोपीय कारोबार के प्रमुख केशव पंडा के हवाले से कहा है कि यदि हम जनवरी की तनख़्वाह बाँट पाते हैं तो ग्राहक कंपनियों का भरोसा हम पर फिर से जमने लगेगा.

पंडा का कहना है कि उन्होंने बहुत से यूरोपीय ग्राहकों से बात की है और उनका रवैया सकारात्मक रहा है.