बुधवार, 21 जनवरी, 2009 को 15:25 GMT तक के समाचार
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का कहना है कि वो अब तक इस बात का अंदाज़ा नहीं लगा पाया है कि सत्यम कंप्यूटर्स का घपला असल में कितना बड़ा है.
दूसरी ओर, सेबी ने कंपनी के प्रमोटरों के लिए नियम और सख़्त करने का फ़ैसला किया है.
सत्यम कंप्यूटर्स के पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू ने लगभग 7800 करोड़ रुपए के घपले की बात स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
बुधवार को सेबी के चेयरमैन सीबी भावे का कहना था, "घोटाले की जाँच के लिए आठ जनवरी को हैदराबाद पहुँचने वाली सेबी की टीम अभी तक यह अंदाज़ा नहीं लगा सकी है कि गड़बड़ी कितनी बड़ी है."
इस मामले में रामलिंगा राजू और उनके भाई रामा राजू को नौ जनवरी को हैदराबाद में गिरफ़्तार कर लिया गया और उसके अगले ही दिन सत्यम के मुख्य वित्तीय अधिकारी वी श्रीनिवास भी गिरफ़्तार कर लिए गए.
दूसरी तरफ़, सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटरों से अनुरोध किया है कि अगर उन्होंने शेयरों के बदले कर्ज लिया है तो वो उसे उजागर करें.
सेबी ने ये फ़ैसला सत्यम में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले के बाद किया है. सत्यम घोटाला मामले की जांच के दौरान सेबी ने कई गड़बड़ियां देखी हैं.
भावे ने कहा कि पारदर्शिता दो सतहों पर होनी चाहिए, पहला, जब कर्ज लेने के लिए दिए गए शेयरों की संख्या एक तय सीमा से ज़्यादा हो और दूसरा तब जब इसकी सार्वजनिक घोषणा एक निश्चित समय अंतराल के बाद हो.