बहुराष्ट्रीय बैंकिंग कंपनी सिटीग्रुप ने बढ़ते घाटे के बीच विशाल समूह को दो टुकड़ों में बाँटने की घोषणा की है.
पिछली तिमाही में आठ अरब डॉलर से अधिक का घाटा होने के बाद कहा गया है कि सिटीग्रुप को सिटीकॉर्प और सिटी होल्डिंग्स नाम की दो अलग-अलग कंपनियों में तोड़ा जा रहा है.
सिटीकॉर्प कंपनी का परंपरागत बैंकिंग का कारोबार चलाएगी जबकि सिटी होल्डिंग्स अधिक जोखिम वाले निवेश के कामकाज को देखेगी.
पिछले साल की तीसरी तिमाही में सिटीग्रुप को दिवालिया होने से बचाने के लिए अमरीकी सरकार ने 45 अरब डॉलर की सहायता दी थी.
अमरीकी सरकार सिटीग्रुप के अधिक जोखिम वाले कर्ज़ों की 306 अरब डॉलर की राशि की गारंटी करने को भी राज़ी हो गई थी.
सिटीग्रुप के मुख्य कार्यकारी विक्रम पंडित ने कहा, "हम अपनी रणनीति पर तेज़ी से अमल करना शुरू कर दिया है ताकि हम अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान दे सकें."
उनका कहना है, "ऐसा करने से हमारी कंपनी का कामकाज सरल हो जाएगा, हम जल्द से जल्द वापस मुनाफ़े कमाने की स्थिति में आने का पक्का कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं."
सिटीग्रुप के कारोबार में कुल 13 प्रतिशत की गिरावट आई है, पिछले वर्ष सिटीग्रुप को कुल मिलाकर 18 अरब डॉलर से अधिक का घाटा हो चुका है. कंपनी का कहना है कि यह आर्थिक मंदी का नतीजा है और इसे दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है.
जानकारों का कहना है कि ऐसा करके सिटीग्रुप अपने फ़ायदे वाले बैंकिंग सेक्टर को घाटे वाले निवेश से अलग करना चाहता है, यही वजह से सिटीकॉर्प को बैंकिंग का काम सौंपा जाएगा ताकि वह सिटी होल्डिंग के भारी घाटों के बोझ तले दबे बिना काम कर सके.
ऐसा करने के बाद जल्दी ही सिटीकॉर्प फ़ायदे में चलने वाली कंपनी बन जाएगी, अगर सिटीग्रुप एक ही कंपनी रहती जिसमें बुरे निवेश भी शामिल होते तो ऐसा होने में बहुत समय लग सकता था.
सिटीग्रुप का कहना है कि वह एक बेहतरीन मैनेजर की तलाश में है जो सिटी होल्डिंग्स की क़िस्मत बदल सके.
सिटीग्रुप ने पिछले साल 52 हज़ार लोगों को नौकरी से हटाया है, कंपनी का कहना है कि अभी शीर्ष स्तर पर कई लोगों को नौकरी से हटाया जाना है.