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मंगलवार, 13 जनवरी, 2009 को 17:50 GMT तक के समाचार

प्रधानमंत्री ने 'सत्यम' की समीक्षा की

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सत्यम घोटाले पर मंगलवार को अपने वरिष्ठ मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ विचार विमर्श किया.

मनमोहन सिंह के साथ बैठक में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृहमंत्री पी चिदंबरम, वाणिज्य मंत्री कमलनाथ, कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलूवालिया मौजूद थे.

प्रधानमंत्री ने सोमवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख सीबी भावे और वित्त मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी विचार विमर्श किया था.

उल्लेखनीय है कि सत्यम कंप्यूटर्स के खातों में व्यापक पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला उजागर होने के बाद सरकार ने कंपनी की बागडोर अपने हाथ में ले ली है.

सरकार ने कंपनी के नए बोर्ड का गठन करते हुए उसमें किरण कार्निक, दीपक पारेख और वी अच्युतन को शामिल किया है जिन्होंने सोमवार को बोर्ड की पहली बैठक की थी.

दूसरी ओर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने सोमवार पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि सरकार सत्यम के नए बोर्ड को हरसंभव मदद देगी ताकि कंपनी इस विवाद से उबर सके.

साथ ही उन्होंने कहा था कि ज़रूरी हुआ तो कंपनी को वित्तीय सहायता दिए जाने पर भी विचार किया जा सकता है.

बड़ा घोटाला

सत्यम मामले को भारत का सबसे बड़ा कारोबारी घोटाला बताया जा रहा है. अभी तक की जाँच में 7,800 करोड़ रुपए के घोटाले की बात सामने आई है.

सत्यम के पूर्व चेयरमैन रामालिंगा राजू हिरासत में हैं और मामले की विभिन्न एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं.

सत्यम में पाई गई धोखाधड़ी का भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी जगत पर काफ़ी बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है और इसी कारण सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि सत्यम के कारोबार को डूबने न दिया जाए.

इधर केंद्र सरकार ने सत्यम कंप्यूटर्स में हुई धोखाधड़ी के मामले की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच विभाग यानी एसएफआईओ से कराने की घोषणा की है.

सरकार ने कहा है कि अगर कंपनी के आडिटर्स के काम में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाएगी तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की जाएगी.

कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद्र गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी ( आरओसी) की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एसएफआईओ को निर्देश दिए हैं.

एसएफआईओ सत्यम के आडिटिंग फर्म प्राइसवाटर कूपर की भी जांच करेगी कि उन्होंने किस तरह से आडिटिंग की कि इस धोखाधड़ी का पता नहीं चल पाया.

प्रेमचंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार सत्यम के 50 हज़ार से अधिक कर्मचारियों और तीन लाख से अधिक शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रही है और इस मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है.