बुधवार, 17 दिसंबर, 2008 को 17:34 GMT तक के समाचार
तेल निर्यातक देशों के संगठन यानि ओपेक ने उत्पादन में रिकॉर्ड 22 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती का फ़ैसला किया है.
सितंबर के बाद से तेल उत्पादन में ये तीसरी कटौती है. इसका अर्थ है कि अब तेल उत्पादन में कुल मिलाकर 42 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती कर दी जाएगी.
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ओपेक की ओर कहा गया कि इस कटौती से तेल के क़ीमतों में बढ़ोत्तरी होगी.
हालांकि इसमें ये नहीं बताया गया कि ओपेक क़ीमतों के किस स्तर को चाहता है.
इस समय कच्चे तेल की क़ीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल से कम चल रही हैं.
ओपेक ने इस बैठक के बाद कहा है कि कटौती का फ़ैसला इसलिए किया है क्योंकि कच्चे तेल की आपूर्ति माँग की तुलना मैं बहुत अधिक हो रही है.
आलोचना
अमरीका ने इस फ़ैसले की आलोचना की है और कहा है कि ये निर्णय दूरदृष्टि भरा नहीं है.
अमरीका का कहना था कि ओपेक के ये ज़िम्मेदारी है कि वह बाज़ार में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सवाल इस बात है कि ओपेक देश जिस कटौती पर सहमत हुए हैं, वो वास्तव में उतनी कटौती करते हैं या नहीं.
जैसे रूस ओपेक का सदस्य नहीं है लेकिन उसने भी इस बैठक में हिस्सा लिया. लेकिन उसने तेल उत्पादन में कटौती के बारे में कोई वादा नहीं किया है.
दरअसल पिछले कुछ हफ़्तों में तेल की क़ीमतों में नाटकीय रुप से कमी आई है.
पिछली जुलाई में तेल की क़ीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं लेकिन अब यह घटकर एक तिहाई से भी कम रह गई हैं.
दरअसल अर्थव्यवस्था के मंदी की चपेट में आ जाने से ऐसा माना जा रहा है कि तेल की माँग में भारी कमी होगी और इसी बिना पर वायदा कारोबार में तेल की क़ीमतें लगातार गोता लगा रही है.
ओपेक के 12 सदस्य देश हैं और वे दुनिया के कुल तेल का 40 प्रतिशत उत्पादन करते हैं.