सोमवार, 15 दिसंबर, 2008 को 12:18 GMT तक के समाचार
केंद्रीय श्रम मंत्री ओस्कर फ़र्नांडीज़ ने कहा है कि इस साल वैश्विक मंदी की वजह से अगस्त और अक्तूबर के दौरान 65,500 से भी ज़्यादा लोगों ने अपनी नौकरियाँ गँवाई हैं.
उन्होंने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि वाणिज्य विभाग ने निर्यात संबंधित 121 कंपनियों का अगस्त और अक्तूबर, 2008 के दौरान का अध्ययन कराया था.
इस अध्ययन से यह भी पता लगा है कि इस दौरान निर्यात कंपनियों को 1792 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
वाणिज्य विभाग ने प्राथमिक रोज़ग़ार सेक्टरों का अध्ययन किया जैसे चमड़ा, रेडीमेड कपड़े, इंजीनियरिंग, नग, आभूषण, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण इत्यादि.
फ़र्नांडीज़ ने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में विश्वास लाने, विकास बढ़ाने और संकट से उबरने के लिए कुछ उपाय शुरू कर दिए हैं
आर्थिक पैकेज
उन्होंने बताया, "इसके लिए उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण क़दमों में रिज़र्व बैंक के बाज़ार में नकदी संकट से बचने और तरलता बढ़ाने के अनेक उपायों समेत सरकार का आर्थिक पैकेज शामिल हैं जिनमें होम लोन की दरों और आबकारी शुल्क को कम किया गया."
ग़ौरतलब है कि पिछले ही दिनों भारत सरकार ने वैश्विक आर्थिक संकट से पैदा स्थिति के मद्देनजर देश में आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने के लिए लगभग 20,000 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी.
मांग को बढ़ाने के लिए टैक्स में कटौती की गई है और बुनियादी ढांचे की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त धन आवंटन करने का फ़ैसला किया गया.
सरकार ने मूल्य संवर्धित कर या वैट में चार प्रतिशत की कमी की तो ऐड वेलोरम रेट में भी कटौती की गई थी.
कपड़ा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त 1,400 करोड़ रुपए दिए गए हैं जबकि निर्यात को बढ़ावा देने लिए अनेक क़दम उठाते हुए केंद्र ने निर्यात प्रोत्साहन के लिए 350 करोड़ रुपए अतिरिक्त कोष की घोषणा की थी.
सेनवेट में कमी की गई है. इस वित्त वर्ष के बचे हुए समय के लिए सरकार ने सेनवेट में चार फ़ीसदी तक की कमी सभी उत्पादों के लिए की है.