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रविवार, 14 दिसंबर, 2008 को 22:48 GMT तक के समाचार

किसी को राहत, किसी का नुकसान

विश्व बैंक के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अमीर देशों की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं को बेहतर स्थिति में लाने की कोशिशों से दुनियाभर के विकासशील देशों का नुकसान होगा.

रॉबर्ट ज़ोएलिक ने कहा कि विकसित देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को संभालने की कोशिशों का असर विकासशील देशों को मिलने वाले अनुदानों पर पड़ेगा.

ग़ौरतलब है कि दुनिया की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इन दिनों बड़े आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रही हैं.

इस संकट के दौर से उबरने के लिए विकसित देशों ने बड़े आर्थिक पैकेजों की घोषणाएं भी की हैं ताकि अर्थव्यवस्थाओं को संकट से उबारा जा सके.

पर अब विश्व बैंक ने बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बचाने की कोशिशों से विकासशील देशों को होने वाले नुकसान के बारे में चेताया है.

विश्व बैंक प्रमुख का कहना है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए जिस तरह से पैसा दिया जा रहा है उससे विकासशील देशों को अपने खर्चों और ज़रूरतों के लिए बाज़ार से चंदा या अनुदान जुटा पाने में दिक्कतें आएंगीं.

बड़ी चिंताएं

उन्होंने दो तरह के ख़तरों की ओर सीधे तौर पर इशारा किया.

पहला, कि आर्थिक संकट के कारण दुनियाभर में उस पैसे की उपलब्धता में कमी आएगी जिसे अभी तक मानवीय आधार पर दिया जाता रहा है.

यानी मानवीय आधार पर जो पैसा बड़े दानदाताओं की ओर से ग़रीब देशों को मिलता रहा है, उसमें कमी आने की आशंका जताई गई है.

दूसरा यह कि दुनिया के कई देशों में उपजे बेरोज़गारी के संकट ने इस ख़तरे को और दोगुना कर दिया है. अच्छे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अब दान देने के लिए हाथ खुला रखने के बजाय रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं.

बड़े आर्थिक पैकेजों पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए विश्व बैंक प्रमुख ने यह भी कहा है कि बाज़ारों की स्थिति सुधारने के लिए जिस तेज़ी से और जितनी बड़ी मात्रा में पैसा तेज़ी लाने के लिए डाला जा रहा है वो उन्हीं वजहों में परिणीत हो सकता है जिसके चलते आज की आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हुई है.