शुक्रवार, 12 दिसंबर, 2008 को 17:54 GMT तक के समाचार
भारत में औद्योगिक विकास की दर में एक दशक के अंतराल में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है.
भारत में अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की कमी आई है, पिछले वर्ष इसी महीने में 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई थी.
जानकारों का कहना है कि यह दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी की मार है और आने वाले महीनों में भारतीय औद्योगिक जगत का भविष्य काफ़ी कठिन दिख रहा है.
भारत सरकार ने चार अरब डॉलर की आर्थिक सहायता उद्योगों को देने की घोषणा पहले ही कर दी है और इसके अलावा ब्याज दरों में कटौती के साथ ही कैश रिज़र्व रेशियो में भी बदलाव किए जा चुके हैं.
भारत सरकार जल्दी ही आर्थिक पैकेज की दूसरी किस्त की घोषणा भी करने वाली है.
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन में गिरावट भारत के लिए बहुत ही चिंताजनक संकेत है.
एक दशक में भारत में कारों की बिक्री में इतनी कमी कभी नहीं आई थी, देश में कारों की बिक्री एक झटके में 20 प्रतिशत गिर गई है.
व्यावसायिक वाहनों का तो और भी बुरा हाल है, उनकी बिक्री में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है.
गिरती माँग की वजह से ज्यादातर कार निर्माता कंपनियों ने अपना उत्पादन और क़ीमतें दोनों घटा दी हैं.
जीके इंडस्ट्रीज़ के मुख्य अर्थशास्त्री टीके भौमिक कहते हैं, "ये आंकड़े भयावह हैं, इससे यही पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत बुरे हाल में है. यह सरकार के लिए ख़तरे की घंटी है."
उनका कहना है कि बाज़ार में माँग को बनाए रखने के लिए सरकार को आर्थिक सहायता देने के अलावा ब्याज दर में भारी कटौती करनी होगी.
जाने-माने अर्थशास्त्री रॉबर्ट प्रियर कहते हैं कि आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था और ख़ास तौर पर उसके औद्योगिक क्षेत्र की हालत धीरे-धीरे पतली हो रही थी लेकिन अब तो तेज़ गिरावट का दौर शुरू हो गया है."
पैकेज
भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए आर्थिक पैकेज के एक और किस्त की घोषणा अगले सप्ताह करने जा रही है.
कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमें घरेलू माँग को बनाए रखना होगा, सरकार अर्थव्यवस्था की विकास दर को 9-10 प्रतिशत तक बनाए रखने के लिए हरसंभव क़दम उठाएगी. सरकार अगले सप्ताह इसीलिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करने जा रही है."
उन्होंने बताया कि इस आर्थिक पैकेज का उद्देश्य साख की उपलब्धता और रोज़गार को बढ़ाना है.
कंपनियों ने आर्थिक पैकेज का स्वागत किया लेकिन उनका कहना था कि ये पर्याप्त नहीं है.