सोमवार, 24 नवंबर, 2008 को 23:11 GMT तक के समाचार
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भले ही आर्थिक स्थितियों के लिहाज से यह वर्ष कुछ कठिनाइयों भरा हो पर इसके बावजूद विकास दर एक अच्छी स्थिति में बनी रहेगी.
हालांकि वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अर्थव्यवस्था को और प्रतियोगी बनाने के लिए आर्थिक सुधारों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है.
नई दिल्ली में आर्थिक संपादकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सात या आठ फ़ीसदी की दर से विकास होता रहेगा.
चिदंबरम ने कहा कि भारत के संदर्भ में बात करते हुए आर्थिक मंदी जैसे शब्द का प्रयोग करना उचित नहीं है क्योंकि जहाँ एक ओर दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की हालत चरमराई हुई है, भारत अभी भी दुनिया में दूसरी सबसे बेहतर विकास दर वाला देश है.
हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर स्वीकार किया कि देश एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है.
ब्याज़ दर में कटौती
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अगर मुद्रा स्फ़ीति की दर में इसी तरह गिरावट होती रही तो ब्याज दर में और कटौती की जा सकती है.
ब्याज दरों के मुद्दे पर सवालों का जवाब देते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों ने घर ख़रीदने के लिए ऋण की दर में 75 बेसिक प्वाइंट की कमी की है.
लेकिन वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस बारे में निजी बैंकों को सलाह नहीं दे सकते.
भारत में मुद्रा स्फ़ीति की दर में गिरावट आई है और अब यह 8.90 फ़ीसदी पर है.
वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि मुद्रा स्फ़ीति को लेकर बुरा समय निकल चुका है. अगस्त में मुद्रा स्फ़ीति की दर 12.91 फ़ीसदी तक पहुँच गई थी.
पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि वित्तीय संकट के इस दौर में आर्थिक सुधारों की समीक्षा और अधर में पड़े सुधारों पर विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है.